Online TransLiteration by girgit.chitthajagat.in, of http://www.videha.co.in/new_page_4.htm Disclaimer
You may also see this page in Bangla, Devanagari, Gujarati, Gurmukhi, Kannada, Malayalam, Oriya, Roman(Eng), Tamil, Telugu
logo logo

वि दे ह

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य

India Flag Nepal Flag

(c)२००४-१२.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

वि  दे  ह विदेह Videha बिदेह http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

Read in your own script

Roman(Eng) गुजराती बांग्ला ओड़िआ गुरमुखी तॆलुगु तमिऴ् कन्नड मलयाळं हिन्दी

मुन्नाजी- १७ टा गजल

1

बनलै सरकारी किरानी जिनगी नेहाल भ' गेलै

प्रूफ पढ़ि संपादक कहेबा लेल बेहाल ' गेलै

रंगकर्म केर ज्ञानक बिन पिटए डंका सगरो

मैथिली रंगकर्म क्षेत्रक ओ बुझू दलाल ' गेलै

मारि अंघोरिया तकै प्रायोजक खरचा-पानि लेल

मैथिली केर नाम बेचि बुझू जे मालो-माल ' गेलै

रंगोत्सवमे लागै सर्वभाषा रंगमंचनक भीड़

देखू जे अपन भाषाक नाटकक अकाल भ' गेलै

आखर---19

2

धार एखन धरि तँ उफानपर अछी

लोक ताका-ताकी करैत बान्हपर अछी

नहि जानि किओ केखनो जाएत भसिया

किओ कोठा पर किओ मचानपर अछी

कोठो बलाकेँ तँ नै बकसथिन्ह कमला

दूनू बगलीक बान्ह कटानपर अछी

भोर होइते मचि गलै गरद-मिसान

कोठा आ मड़इया दूनू भसानपर अछी

आखर-15

3

आजुक युगक कथा पुराण सुनू

जाहिसँ पेट भरए सएह गुनू

नै करू देखाँउसे दूइर समय

स्वंय कोनो समस्याक निदान चुनू

जँ लागल पसाही अनका घरमे

तकरा लेल अहाँ नै कपार धुनू

घर तँ बचाउ सदिखन अप्पन

मुदा तेँ दोसरा बेर नै आँखि मुनू

आखर13

4

माछ मँगैए आरक्षण गणतंत्रक लिहाजसँ

माटि-पानि छोड़ि देलक आब चलैए जहाजसँ

छोड़ि भरोसा जालकेर निकलै छलै ओ गाँजसँ

एलेक्ट्रीक-मशीन आबि करैए बहार माँझसँ

कनिक्के पानि पसीन नै निकलैत छी बैराजसँ

बर्फक बीच जीबि आब खुश भ' गेलौ सुराजसँ

ओतौ नेता भेल प्रविष्ट जुटै छी एक अवाजसँ

मनुक्खो डरैत अछी सिंगी-माँगुर जाँबाजसँ

आखर---18

5

फिकर जिनगीक ' नै सकल

तैँ आइ खाधिमे खसि गेलौं हम

सुरता रखै छी आइयो अपन

मुदा बेगरता नै बुझलौं हम

गाछसँ खसै छल पहिने लोक

आइ जमीनेपर खसलौं हम

बुझि धारक कछेर अपनाकेँ

नाव केर फेरा बढ़ा देलौं हम

माँझ आँगनमे कतिआएल छी

अपने चालिसँ बेरा गेलौं हम

आखर---12

6

बिगड़लो रुपकेँ नकल करैए आब लोक

नकलोकेँ यथार्थ संजोगि राखैए आब लोक

दायित्व बुझैए मात्र अपन स्वार्थपूर्ति लेल

अनकामे अपनाकेँ विलगा लैए आब लोक

धुँआधार हँकैए गप्प लोक कल्पनाकेँ भावेँ

यथार्थमे अपनाकेँ सुनगा लैए आब लोक

जीबनक दशा-दिशा तय करैए मात्र स्वंय

भाइ देखावामे स्यंवकेँ हेरा लैए आब लोक

देखू पहिनेसँ आरक्षित भ'केँ जिबैए सभ

मुदा बेर पड़ने देखार होइए आब लोक

स्तरसँ उपर जीबाक भ' गेलैए परिपाटी

पाइक फेरमे भ्रष्टाचारी भेलैए आब लोक

आखर---17

7

नेताक फाँसमे फँसल ई भारत भाए-भैय्यारी जकाँ

देखू छटपटा रहल माछ भरल अपियारी जकाँ

लोक तँ कटैए घिसिऔर महँगाइसँ मारल ' '

भावे मुदित मुदा स्वर निकलैछ फकसियारी जकाँ

आर्थिक उदारीकरण कमाइ आब लाखमे होइछ

मुदा वैश्विक परिस्थितिमे मोल लागए हजारी जकाँ

बिहारक सिरखारी बदलि गेल सन लगैए आब

श्रमिक घटलासँ कंपनी-मालिक लगै बिहारी जकाँ

आइ धिया-पुता घुमैए प्रशिक्षित बेरोजगार ' '

महँगाइमे आंशिक लाभ पाबि बुझैए दिहाड़ी जकाँ

आखर---20

8

आइ सगरो समाज लागै दलाल छै

पाइ लेल अपनोकेँ करै हलाल छै

रखने रहै अछी मुट्ठीमे माटि नुका

कहि क' सोना बेचबा लेल बेहाल छै

आधुनिक दौड़मे अछी मातल सन

आर्थिक उदारीकरणकेँ कमाल छै

टल्हाकेँ किनैए सोना बुझि लोक सभ

विदेशी ब्राण्ड-नाम पाबिए बेहाल छै

खुलल पोल छलै दलालक जखने

इंटरपोल धरि मचल बबाल छै

तखन सरेण्डर करै तस्कर सभ

कहै छै जे इ देशभक्तिक सबाल छै

भरि लेलक अछी स्विस बैंकक खाता

जोड़ि हाथ कहै गलतीकेँ मलाल छै

आखर---14

9

कएल कोनो कुकृत्यसँ लोक नै आब ढ़ठाइए

वएह कुकर्मी सभ-सभ ठाम आब ठठाइए

लोक पबैए रोजगार तँ बुनैए नव समाज

जत' जा कमाइए ओतुके भ' आब सठिआइए

उघरल लोक सभकेँ छुट्टा भ' घुमैत देखब

मुदा झँपलाहा लोक सभ लाजे आब ढ़ठिआइए

नीक काज केनिहार सभ झँपले रहैत अछी

नीच काज केनिहारक झंडा आब उधिआइए

आखर---18

10

बुझाइ नै अछी बात जे कोन अभिप्राइ छै

कटै अपनोकेँ पाछू ने कोनो सम्प्रदाइ छै

गनै अछी पाइ केर सदिखन आँखि खोलि

काजक बेरमे देखिऔ लागत औंघाइ छै

मातल छै दिनोमे कैंचाक जोगारक लेल

मंगनी बला काजकेँ पुछीऔ तँ खौंझाइ छै

सटू किरानी बाबूसँ घूस केर गप्प लेल

पाइ लैते अनर्गलो काज पूरा भ' जाइ छै

संत रहै छै सभ उपरसँ देखलापर

पकड़ेला पछातिये किओ चोर कहाइत छै

आखर---16

11

ई दौड़ए नेतबा दिल्ली धरि

जेना भैंसी दौड़ै मालक थरि

खाँहिस तँ भरब जेबी छै

दूनू छोड़ए ने कोनो कसरि

बीत नापि ' हाथ गनाबए

छै एकल नापिक नै असरि

भरल पंचैती माथ झुकाबै

ई जान बचाबै कोना ससरि

बाँटै धरमकेँ दुनू मीलि क'

कूटि-चालि तँ जाइछ घोसरि

आखर---11

12

फाटैत छल जतए मेघ आ जमीन

पहुँचल पहिने ओतहि अभागल

बुझनुक बुझए सियार अपनाकेँ

जा धरि छल टिकल नीलमे राँगल

फँसि गेल अपनेसँ व्यूहमे बेचारा

नै भेलै लाठी अपने ओकरा भाँजल

जत' शेर राज करै छल पहिनेसँ

बुधियार छल ओ पहिनेसँ माँजल

सियार जा ' पढ़ौलक मंत्र जखन

प्रजा शेरसँ छल पहिनेसँ साधल

आखर---14

13

कसमकस सन जिनगी जीब कतेक दिन

इ कहू खूनक घोंट पीब कतेक दिन

भाइ जँ जीबाके अछी तँ जीबू एना

देखू जेना जिबै छै माछ पानिक बिन

14

जे चुबै छै ठोर-आँखिसँ ओकरा ताड़ी बुझू

जँ पीतै केओ संसारमे तँ बरबादी बुझू

आब तँ एहने बिआहक परिपाटी बुझू

लिव-इन-रिलेशन वाली घरवाली बुझू

भाइ जेबीमे घुसल हाथक की महत्व छै

तालसँ ताल मिलए तँ ओकरा ताली बुझू

निराशा संग आशापर टिकल छै दुनियाँ

जँ देखलहुँ भगजोगनी तँ दिवाली बुझू

बहुतों अछी संसाधन देश-परदेशमे

मुन्ना अछी निकम्मा तँ ओकरा मवाली बुझू

आखर-----16

15

जुग बीति गलै लगबैत जोगारमे

मुदा पता नै की लीखल छै कपारमे

दिन बितेलौं दोस्तीए निमाहि हम तँ

तैयो छल हत्यारा अपने भजारमे

भाइ जे काटैए गरदनि सदिखन

ओ माथा टेकैए मंदिर-मजारमे

हे एना नै चलू हाथ छोड़ि बाटपर

बहि जाएब कहियो उन्टा बयारमे

जे बुझतै बितैत समय केर मोल

मुन्ना ओकरे दिन बिततै बहारमे

आखर-----14

16

आब कविता आ गीत नै गजल चाही

अपहर्ता चाँगुरसँ सकुशल चाही

ठोरक मुस्की बनल रखबाक लेल

धन आ जन सभहँक सबल चाही

जहिया धरि रहत पेट खाली सन

गीत आ संगीत नै पेटक अमल चाही

कते आश करू हुनकर मड़ैयाक

आब अपन बनाओल महल चाही

तकनीकी रुपें भ' रहल छी सबल

तँए इ भ्रष्ट व्यवस्था बदलल चाही

आखर-----14

17

इ लोक कहैत हो किच्छो मुदा एहन बात भेल छै

जाहि नगरसँ गेल बिहारी ओ मसोमात भेल छै

आएल सुबुद्धि अपन श्रमकेर बूझल महत्व

आब तँ अपनो राज्यमे विकासक परात भेल छै

देखू जकरा नामपर माँगल गेलै सुख-सुविधा

देशमे ओ बेचारा तँ बहुत दिनसँ कात भेल छै

बोनिहार बिन अछी डुबल कतेको कंपनी देशमे

आब बुझू जे सभ अहंकारीकेँ पक्षाघात भेल छै

दोसरक बलें रहैए ओ बहुत कुदैत-फनैत

मुन्ना तँए साहित्यो ओकर बापक जिरात भेल छै

आखर-----19


ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।