वि दे ह विदेह Videha बिदेह http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Read in your own script Roman(Eng) Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।
१.निशान्त झा
२.
सत्यनारायण
झा ३.
जवाहर
लाल कश्यप
१
निशान्त झा
जीवन डायरी क तीन पन्ना
दू पन्ना
ईश्वर पहिनेसँ
लिखने छथि
पहिला
"जन्म"
आ
अंतिम
"मरण"
केवल बिचला एक पन्ना
मात्र अपन
जकरा
हमरा
लिखनाइ अछि
आँखि
मे नीक
सपना लेने
टूटल हौसला
पर बिना कनने
मेहनतक
पतीक्षारत
रही
रेत बालू क
बीज
केनाइ
अछि
करुणा प्रेम सँ
व्यथित केँ
व्याध हरनाइ अछि
हरित वसुंधरा क
स्वर्णिम पल लेबक अछि
हाथ सँ
हाथ
पाखुर सँ
पाखुर
मिलल
बढ़िते
जयबाक
अछि
लक्ष्य केँ
पएबाक
अछि
ढौर लिअ
हाथसँ
क्षितिज केँ ढौर दियौ
अहाँ
पल पल केँ
बान्हि
कऽ
तिल्सिमी चादर बुइन
दियौ
अहाँ
धरा फेर अहांक अछि
आकाश फेर अहाँक
२
किछु
विचार
“राम”
पर
एक
राम!
अहाँ भगवान
नै
छलौं
अहाँ तँ
छलौं ,
प्रतीक मात्र
आ
रहब !
दीन-हीन
जनक
संबलक
विश्वास
कए !
ओइ
धर्म-मर्यादित
आचरणक
जकर
कारण सँ
अहाँ
भोगलौं
चौदह सालक
वनवास
आ
उपहार भेटल अहांकेँ
सीता विछोहक
राम!
अहाँ भगवान
नै
छलौं
अहाँ तँ
छलौं,
प्रतीक मात्र
आ
रहब
पुत्र धर्मक
प्रजाक
पालनहार सत्यनिष्ठ राजाक!
के कहैत अछि अहाँ
भगवान
छलौं
अहाँ
तँ
मनुखे
छलौं
तखने तँ
पूजने छलौं
अहाँ
शिव
केँ !
ई आर
बात अछि
कि अहाँ
“आदर्श”
छलौं
अहांक
कर्म अहांकेँ
हमरासँ
ऊंच उठा देलक
अतेक ऊंच कि
अहाँ
भगवान क समकक्ष भऽ
गेलौं
पूजय
जाइ
लगलौं
भगवान कहाए लगलौं
राम!
अहाँ मनुखे
किएक नै
रहलौं!
दू
राम!
अहांक नाम
लक्ष्मण या किछु
आर
होइतए
तँ
की
अहाँ ओ
सभ
नै
करितौं
जे
अहाँ
केलौं
!
तीन
राम!
कखनो -कखनो
तँ
लगैत
अछि
अहाँ
भगवाने
छलौं
मनुख
नै
किएकि
जय
सीताक
लेल
अहाँ
लंकाक नाश
केलौं
हुनके !
हुनके अहाँ
तियागि देलौं
मनुख तँ
एना
नै
कऽ
सकैत अछि
.
३
ई जमीन अछि गामक
गौर सँ
देखु एकरा आ
प्यारसँ
निहारि
लिअ
आराम सँ
बैसु अतए पल दू
पल बिता
लिअ
सुध कनी
लऽ
लिअ
अतए पर एकटा हरियर घावकेँ
की
ई
जमीन अछि गामक,
हँ ई जमीन
अछि गामक ......
कुल कुनबा आ
कुटुमक अर्थ
बेमानी भेल
दादा कक्का
हरा गेल सभ
बिसरि
गेल
बड़की
मैयाँ
गाम
भरिमे रिश्ताकेँ
केहेन डोरमे छल बान्हल
जातिक
भेद रिश्ताक तराजू
छल साधल
याद अछि अखन तक धीमरकेँ
इनारक
छाहक .....
कि ई
जमीन अछि गामके ,
हँ ई जमीन
अछि गामके ......
आपसक
संबंधक चौंतार पर बैसि कऽ
छल सब छौरा बहुते
रौब सँ
किछु ऐंठ
कऽ
छल नै पैसा बहुत आ
नै
अधिक सामान छल
पर हमर ओही गाममे
सभक
बहुत सम्मान छल
मांगि
कऽ
कपडा
बनल बरयातीक
दादाक ...
कि ई
जमीन अछि गामक ,
हँ ई जमीन
अछि गामक ......
गामकेँ
जखनसँ
शहरमे आन जान भऽ
गेल
गामक
सभ
मनुख आब खाना खाना भऽ गेल
सए
बीघाक मालिक
गामक
अपने तँ
छल
पगारक
चक्कर मे छेदी
शहर मे अछि हरा गेल
बात करय के अछि हमरा ओइ
दौरक
ठरावक ...
कि ई
जमीन अछि गामक,
हँ ई जमीन
अछि गामक......
२.
सत्यनारायण
झा
पत्र
लिखि रहल छी आखर हम ,प्रिये अहींक नाम
गेल छलौ पूजा मे ,हम अपना गाम |१
गामक माटि छलै ,ओहिना गमकैत ,
फूल पात सभ गाछ मे ,छलै ओहिना झुलैत |२
छौड़ा सभ गाछ पर ,झूला झुलैत छल ,
सिनेह-प्रीतिक गीत सभ ,ओहिना गबैत छल |३
यारक दलान एखनो पूबे मुँहे छल ,
बाबाक आँगन ,सुन सान लगैत छल |४
एकोटा लोक नहि, एकोटा बेद नहि ,
सांझे सं अंगना मे कुकुर भुकैत छल |५
की कहू हाल हम, भैया भउजी केर ,
बेटाक मारि सं, बेदम रहथि फेर |६
गामक हालात छैक एकदम खराब ,
टोले टोल भेटत आब बोतल शराब |७
नहि छलै ब्रह्मस्थान मे ओ पाकरिक गाछ ,
नहि छलै ओकरा आव, बरक गाछक साथ |८
महराजी पोखरिक छैक , आव हालत बेहाल
घाट सभ टुटल छैक ,रूप विकराल |९
आँगन मे आव ,एकटा हवा बहल छै ,
सभहक पुतौहु आव, रौदा तपैत छै |१०
बाँध बोनक हाल एखनो हरियर लगैत छैक ,
घास काटय एखनो घसवहिनी भेटैत छैक |११
देखलौ आँगन मे, गबैत सामाक गीत ,
पोखरिक मोहार पर, भेटल छला मीत |१२
कहलनि भजार ,अहाँ काज कएल नीक ,
गाम आबि गेलौ से, भेलै बर ठीक |१३
की कहू हम आब, गामक कथा ,
लिखि नहि सकै छी, गामक व्यथा |१४
माफ करब अहाँ हम, घूमि नहि सकब ,
गामक हालात जावे, किछु नहि सुधरत |१५
मोन हुए त’ गाम, अहूँ आबि सकै छी ,
गामक सुधार मे, संग द’ सकैत छी |१६
३
जवाहर
लाल कश्यप
छी धन्य हम, हम्मर मिथिला
ई जन्जीर तोडि , स्वीकार करु
सबल छलहुँ, अबल भेलहुँ
सबल बनब संकल्प करु
नव गीत लिखु ,नव बात कहु
आ नवयुग के संधान करु
जाअगु अहाँ हुंकार करु
आ मंगल दिश प्रस्थान करु
नहिं बात बनाउ, नहिं घात लगाउ
पीठक पाछा अपमान करु
सत्य कहु, सम्मान पाउ
आ दोसर के सम्मान करु
भागु नहिं नेता के पाछा
नहिं करु भीखक अभिलाषा
आत्मबल के संग लय
डुनियाँ पर अहाँ राज करु
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
