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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य

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(c)२००४-१२.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

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१.निशान्त झा २.सत्यनारायण झा ३.जवाहर लाल कश्यप

निशान्त झा

जीवन डायरी क तीन पन्ना


दू पन्ना ईश्वर पहिने लिखने छथि
हिला "जन्म"
अंतिम "मरण"
केवल बिचला एक पन्ना
मात्र अपन
जकरा हमरा लिखनाइ अछि
ँखि मे नीक सपना लेने
टूटल हौसला पर बिना कनने
मेहनतक
तीक्षारत रही
रेत बालू क बीज केनाइ अछि
करुणा प्रेम स
व्यथित के व्याध हरनाइ अछि
हरित वसुंधरा क
स्वर्णिम पल लेबक अछि
हाथ स हाथ
पाखुर स पाखुर मिलल
ढ़िते जयबाक अछि
लक्ष्य केएबाक अछि
ढौर लि हाथस
क्षितिज के ढौर दियौ अहाँ
पल पल केँ बान्हि
तिल्सिमी चादर बुइन दियौ अहाँ
धरा फेर अहांक अछि
आकाश फेर अहाँक

किछु विचार राम पर

एक

राम!
अहाँ भगवान नैलौं
अहाँ लौं , प्रतीक मात्र
रहब !
दीन-हीन जन

संबल

विश्वास !

धर्म-मर्यादित आचरण
जकर कारण स अहाँ भोगलौं
चौदह सालक वनवास

उपहार भेटल अहांके
सीता विछोह

राम!
अहाँ भगवान नैलौं
अहाँ लौं, प्रतीक मात्र
रहब
पुत्र धर्म
प्रजाक पालनहार सत्यनिष्ठ राजाक!


के कहैत अछि अहाँ भगवान लौं
अहाँ मनुखे लौं
तखने त पूजने छलौं अहाँ शिव केँ !
ई आर
बात अछि कि अहाँआदर्श लौं
अहांक कर्म अहांके हमरास ऊंच उठा देलक
अतेक ऊंच कि
अहाँ भगवान क समकक्ष भ गेलौं
पूजय जाइ लगलौं
भगवान कहाए लगलौं
राम!
अहाँ मनुखे किएक नै रहलौ!


दू

राम!
अहांक नाम
लक्ष्मण या किछु होइतए
की
अहाँ ओ नै रितौं
जे अहाँ केलौं !

तीन

राम!
कखनो -कखनो
गैत अछि
अहाँ भगवाने लौं
मनुख नै
िएकि
जय सीता लेल
अहाँ लंकाक नाश केलौं
हुनके !
हुनके अहाँ तियागि देलौं
मनुख तँ एना नै सकैत अछि .

जमीन अछि गा

गौर स देखु एकरा प्यारस निहारि लिअ
आराम स बैसु अतए पल दू पल बिता लि
सुध कनी लि अतए पर एकटा हरियर घावके
की जमीन अछि गामक, हँ ई जमीन अछि गामक ......

कुल कुनबा कुटुमक अर्थ बेमानी भेल
दादा क्का हरा गेल स बिसरि गेल की मैयाँ
गारिमे रिश्ताके केहेन डोरमे छल बान्हल

जातिक भेद रिश्ताक तराजू छल साधल
याद अछि अखन तक धीमरके इनारक छाहक .....
कि जमीन अछि गामक , हँ ई जमीन अछि गामक ......

आपसक संबंधक चौंतार पर बैसि
छल सब छौरा बहुते रौब स किछु ऐंठ
छल नै पैसा बहुत नै अधिक सामान छल
पर हमर ओही गामे सभक बहुत सम्मान छल
मांगि कपडा बनल बरयातीक दादा ...
कि जमीन अछि गा , हँ ई जमीन अछि गामक ......

गाके जखन शहरमे आन जान भ गेल
गामक मनुख आब खाना खाना भ गेल
बीघाक मालिक गा अपने त छल
पगार चक्कर मे छेदी शहर मे अछि हरा गेल
बात करय के अछि हमरा ओ दौर ठराव ...
कि जमीन अछि गा, हँ ई जमीन अछि गामक......

२.

सत्यनारायण झा

पत्र

लिखि रहल छी आखर हम ,प्रिये अहींक नाम

गेल छलौ पूजा मे ,हम अपना गाम |१

गामक माटि छलै ,ओहिना गमकैत ,

फूल पात सभ गाछ मे ,छलै ओहिना झुलैत |२

छौड़ा सभ गाछ पर ,झूला झुलैत छल ,

सिनेह-प्रीतिक गीत सभ ,ओहिना गबैत छल |३

यारक दलान एखनो पूबे मुँहे छल ,

बाबाक आँगन ,सुन सान लगैत छल |४

एकोटा लोक नहि, एकोटा बेद नहि ,

सांझे सं अंगना मे कुकुर भुकैत छल |५

की कहू हाल हम, भैया भउजी केर ,

बेटाक मारि सं, बेदम रहथि फेर |६

गामक हालात छैक एकदम खराब ,

टोले टोल भेटत आब बोतल शराब |७

नहि छलै ब्रह्मस्थान मे ओ पाकरिक गाछ ,

नहि छलै ओकरा आव, बरक गाछक साथ |८

महराजी पोखरिक छैक , आव हालत बेहाल

घाट सभ टुटल छैक ,रूप विकराल |९

आँगन मे आव ,एकटा हवा बहल छै ,

सभहक पुतौहु आव, रौदा तपैत छै |१०

बाँध बोनक हाल एखनो हरियर लगैत छैक ,

घास काटय एखनो घसवहिनी भेटैत छैक |११

देखलौ आँगन मे, गबैत सामाक गीत ,

पोखरिक मोहार पर, भेटल छला मीत |१२

कहलनि भजार ,अहाँ काज कएल नीक ,

गाम आबि गेलौ से, भेलै बर ठीक |१३

की कहू हम आब, गामक कथा ,

लिखि नहि सकै छी, गामक व्यथा |१४

माफ करब अहाँ हम, घूमि नहि सकब ,

गामक हालात जावे, किछु नहि सुधरत |१५

मोन हुए त’ गाम, अहूँ आबि सकै छी ,

गामक सुधार मे, संग द’ सकैत छी |१६

जवाहर लाल कश्यप

छी धन्य हम, हम्मर मिथिला

जन्जीर तोडि , स्वीकार करु

सबल छलहुँ, अबल भेलहुँ

सबल बनब संकल्प करु

नव गीत लिखु ,नव बात कहु

नवयुग के संधान करु

जाअगु अहाँ हुंकार करु

मंगल दिश प्रस्थान करु

नहिं बात बनाउ, नहिं घात लगाउ

पीठक पाछा अपमान करु

सत्य कहु, सम्मान पाउ

दोसर के सम्मान करु

भागु नहिं नेता के पाछा

नहिं करु भीखक अभिलाषा

आत्मबल के संग लय

डुनियाँ पर अहाँ राज करु

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