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आशीष
अनचिन्हार
विहनि कथा
1
लक्ष्मी
परिछन-----------भगवती गीत---------हास-परिहासक गीत। बच्चा सभ अनेरो औना रहल छल। दरवज्जा पर धमगज्जर मचल। तुमुल हास-ध्वनि। नाना प्रकारक गप्प-सरक्का। बरक बाप कन्याक बापसँ कहलथिन्ह----" आह बूझि लिअ समधि जे हमरा घरमे लक्ष्मी देलहुँ अहाँ----। कन्याक बाप कहलखिन्ह " हँ से तँ ठीके" आ कहिते आँखि झुकि गेलन्हि आ मोने-मोन बजलथि--" एखन तँ लाखक-लाख टका संगमे अनलीहए ने लक्ष्मी तँ बुझेबे करतीह। जखन खत्म भए जाएत तखन इएह लक्ष्मी कुलच्छनी बनि जाएत।"------
2
अंतर
किछु बर्खक पछाति मैरिज सेरेमनीक शुभ अर्धनिशाभाग रातिमे बर अपन कनियाँसँ पुछलखिन्ह----- कहू तँ हमर सासुर आ अहाँक सासुरमे की अंतर भेटल ?
कनियाँ औंघाएल मुदा चोटाएल स्वरे कहलखिन्ह------"इएह जे अहाँ अपन सासुरमे मालिक रहैत छी आ हम अपन सासुरमे बहिकिरनी"
इ दूनू विहनि कथा मुन्ना जहीकेँ समर्पित छन्हि।
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