वि दे ह विदेह Videha बिदेह http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Read in your own script Roman(Eng) Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।
अतुलेश्वर
गाम मे नहि फागु आ नहि भोरक पराती
मामाजी हमर लगभग 90 वर्षक भ गेल छथि आ हुनकासँ भेंट लगभग एक दशकक बाद भेल छल। कारण मामाजी असर्मथताक कारण आब गाम नहि जा पबैत छथि ओ काशीमे रहि रहल छथि। एहि बेर काशी यात्राक क्रममे मामाजीसँ भेंट भेल, प्रणाम पातिक बाद घरक कुशल क्षेम, काजक विषयमे आ बहुत किछु पुछलनि किन्तु सभसँ बेशी पुछैत छलाह गामक विषयमे। मामाजी काशीमे निश्चित छथि मुदा हुनक आत्मा गाममे छनि। गामक घर, गामक लोक, गामक गाछी बिरछी आदि हुनक स्वप्नमे अबैत छनि। ओना सभक इच्छा रहैत छैक जे जीवन अन्तिम समयमे तीर्थ करी मुदा मामाजीक इच्छा छनि गाम देखि आ गामक लोकसँ भेट करी आ ई इच्छा ओ हमरा बेर-बेर गप्पक क्रममे कहैत छलाह । हमरासँ हुनका एतबहि आग्रह रहैत छलनि जे गप्प गामक कहु प्रदेशक नहि । कारण गाममे परिवर्तन भ रहल छैक कहाँदन बड़का राजपथ बनि गेलैक आब गाम जायब दुस्कर नहि। मामाजी जे गाम देखने छलाह ओ बहुत पिछड़ल। मुदा हम मामाजीक एहि भावावेशकें देखैत कहलियनि मामाजी अहाँ जे गाम ताकि रहल छी जे गामक स्मृति अहाँ रखने छी से गाम आब नहि छैक गाम बदलि गेल छैक सभ किछु गाममे ओहिना भ गेल छैक जहिना शहरमे । आब गामो मे सभ किछु बिकायत छैक ,आब ओ गाम नहि ओ तँ एकटा बाजार अछी जतए शहर लोक अपन गाम तकबाक लेल अबैत अछी ओ लोकनि गाममे अपन जीवन तकैत छथि मुदा गाममे हुनका संग ग्राहक जेकाँ व्यवहार कयल जाइत अछी जहिना भारतक संस्कृति देखबाक लेल आयल विदेशीक संग भारतीय लोकनि करैत छथि ओहि प्रकारें कतहु संवेदना नहि कतहु भावनाक भाव नहि। आ हमर ई गप्प सुनि मामाजीक आँखि नोरसँ भड़ि जाइत छनि मुदा हम सत्य कें कतेक नुका नहि सकैत छलहुँ। आ ओकर पश्चात मामाजी गामक खिस्सा हमरा सुनबय लगैत छथि । हुनका लग परतंत्र भारतक गामक खिस्सा छल तँ स्वतंत्र भारतक गामक खिस्सा ,बाढ़ि आ रौदीक खिस्सा छल तँ हरित क्रांतिक , गामक लोकक खिस्सा छल तँ गामक जीवनक सेहो मुदा मामाजी क कहल प्रत्येक गप्प हमरा आब खिस्सा लागि रहल छल। कारण जखनि गाम जाइत छी तं अपन हेरायल गामकें ताकैत छी मुदा गाम नहि भेटैत अछी ओ गाम जे पिताक उपन्यास , कथा आ कविताक गाम छल । विदेश्वर बाबा मंदिरक घंटी , दादीमाँ क पराती ।, ओना हमरा हुनक कहल गामक ओ यथार्थ आब खिस्सा लागि रहल छल कारण मामाजी अनुसार गाममे सभ कियो एक दोसराक लेल जीबैत छल मात्र अपने टा लेल नहि । ककरो सुख वा दुखकें अपन बुझैत छल, ककरो समांगक लेल खोजय नहि पड़ैत छलैक सभ कियो सभक समांग छलैक । सभक बच्चा काशी , इलाहाबाद ,दरभंगा आ पटनामे पढ़ैत छल मुदा सभक अभिभावक गामक एक गोटें होइत छलाह सभ बच्चा अपन खगता ,अपन आकांक्षा ओहि गामक अभिभावकसँ ओहि प्रदेशमे कहैत छलाह आ एकर अर्थ गामक संबंध प्रदेश धरि ओहिना छल ई एकर प्रमाण छल।
हमरा हुनक गामक प्रति एहि अगाध विशेषता सुनि रहल नहि गेल आ हम मामाजी सँ पूछी बेसैत छीयन्हि - मामाजी अहाँ जे गामक गप्प कहैत छी ओ गाम हम सभ नहि देखि रहल छीयैक हम सभ जे गाम देखि रहल छी ओ हमरा शहरक संस्कारसँ लिप्त भेटैत अछी आ अहाँ सँ सुनल गाम तँ आब खिस्सा भ सकैत अछी यथार्थ नहि । कारण जहिना शहरमे ककरो एक दोसरा सँ कोनो सम्पर्क नहि उएह स्थिति गाम मे अछी आ गाम सभ्य रहल अछी , गाममे रहनिहार लोक कहैत छथि। कारण हुनका लोकनिक कहब अछी जे पहिने गामक लोक अनेरे घुर लग बैसि समय बर्बाद करैत छलाह आब देखियो सभ अपना मे मस्त अछी घुर कि बरंबडा पर एकठाम बैसल लोककें नहि देखि सकैत छी ।
मामाजी गामक अल्हुआ , मड़ुआ आ नवका अगहनी चाउरक भुझल भुझाक स्वाद मोन पाड़ि रहल छलाह आ हम हुनका गामक सिंघारा , चाउमीन आ चाटक स्वाद कहि रहल छलयन्हि । मामाजी कुँवरसिंह थानक कीर्त्तन मोन पाड़ि रहल छलाह आ हम हुनका नवका भजनक गप्प कहि रहल छलयन्हि , मामाजी पैटघाट चौकक यात्रा दिनक खिस्सा कहि रहल छलाह आ हम हुनका सभ बेर मारि भ जाइत अछी झिलहौरक लेल पानि कत जेना –तेना दुर्गाजीक प्रतिमा भसि जाइत अछी ।
आ हमरा लागल मामाजीकेँ हमर एहि गप्प पर मोन नहि मानि रहल छनि आ अन्तमे कहैत छथि छोटु ई कोना भ सकैत छैक कारण गामक अर्थ गामक गीत, प्रीत आ रीति होइत छैक । कि सभटा बिला गेल गामसँ । आ हम कि कहि सकैत छलयन्हि जे मामाजी आब नहि तँ गामक गीत , प्रीति आ रीति सभटा अहाँक सुनाओल गामक खिस्सा जेकाँ ओहो सभ आब एकटा अतीतक खिस्सा भ गेल छैक। नहि फागु छैक आ नहि भोरक पराती।
अन्त मे पाठक लोकनि ई मात्र हमर मामाजी क स्वप्नक गामक खिस्सा नहि , ई प्रत्येक मिथिलाक गामक खिस्सा छी। कि हम असत्य कहि रहल छी कारण सभ गोटाकें गाम हमरे जेकां भेटत।हमर मामाजीक गाम आब नहि भेटत । कियाक ? ई एकटा सोचनीय प्रश्न अछि।
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
