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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य

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(c)२००४-१२.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

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राजेन्द्र कुमार प्रधान

जन्म- 03/09/1970

पिता स्व. बैद्यनाथ प्रधान

गाम- मरूकिया, पोस्ट अन्धड़ाठाढ़ी, जिला-मधुबनी।

पिन- 847401

योग्यता- एम.ए. पटना विश्वविद्यालय, पटना

शोधरत्त (पीएच.डी) ल.ना.मि.वि.वि. दरभंगा,

अन्य योग्यता- संगीत गायणमे जेड.एल. कम्युनिकेशन द्वारा आयोजित ऑल बिहार फिल्म संगीत प्रतियोगितामे प्रथम स्थान प्राप्त। रिसर्च स्कॉलर, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय- दरभंगा।

२१म शताब्दीक पहिल दशकक मैथिली उपन्यासमे राजनीतिक चेतना- राजेन्द्र कुमार प्रधान

उपरोक्त शीर्षक 21म शताब्दीक पहिल दशकक उपन्यासमे राजनीतिक चेतना- कोनाे सामाजिक उपन्यासमे प्रस्तुत विषय-वस्तुक हएब प्राय: स्वभाविक अछि। उपन्यास एक एहन विधा थिक जइमे सम्पूर्ण जिनगीक वर्णन रहैत छैक। जिनगीक एकटा अहम अंग राजनीति होइछ। जाहिसँ उपन्यासमे मोड़ आनल जाइत अछि आ दिशाकेँ बदलि दैत छैक। व्यक्ति भलहिं व्यक्तिगत स्थितिकेँ द्योतक हुअए मुदा जिनगी एकटा एहन विशाल परिक्षेत्रक नाओं थिक जे समाजक बीच पसरि जाइत अछि। मनुख जखने समाजसँ जुड़त तँ ओइमे राजनीति स्वत: एक अंग बनि जाएब स्वभाविक अछि।

पहिल दशकमे प्रकाशित उपन्यास तँ बहुतो होएत मुदा हम जेतबा पढ़ि वा देखि सकल छी मात्र तेकरे वर्णन एे आलेखमे क रहलौं अछि।

जगदीश प्रसाद मण्डल- जीक उपन्यासकेँ मैथिली साहित्यमे सार्थक राजनैतिक चेतना जगेबाक प्रारम्भक रूपमे देखि सकै छी, मौलाइल गाछक फूल उपन्यासमे राजनीतिक चेतना ओत-प्रोत अछि। जाहिमे ग्रामीण जीवनमे पसरल समस्याक यर्थाथ चित्रण केलनि अछि। प्रस्तुत उपन्यासमे सुबुध नामक एकटा पात्र जे शिक्षक छथि ओ अध्यापन कार्यमे लागल रहैत छलाह। गाम-समाजक चिन्तासँ मुक्त छलाह। जखन रमाकान्त बाबू मद्राससँ घुरि अपन गाम एलाह आ हुनकामे ई चेतना भेलनि जे अनेरे जमीन हम किअए रखने छी तखन अपन 2 सए बीघा जमीन समुच्चा ग्रामीणमे बाॅटि समाजकेँ परिवार रूपमे देखए केर नजरिक पता शिखक सुबुधकेँ लगलनि तखन हुनकामे सेहो चेतना एलनि आ अपन नौकरीसँ तियाग पत्र द’ पुन: आपस आबि जाइ छथि। गाम-समाजक बीच ऐबाक लक्षण एकटा राजनीतिक चेतनाक अपूर्व कृतिमान उपस्थित करैत अछि। तहिना जिनगीक जीत उपन्यामे समाज दशा-दिशाक यर्थाथ चित्रण करैत अर्थनीति केर मूल रहस्यकेँ उद्घाटित करबाक जे प्रयास मंडलजी केलनि अछि ओ एक अद्भुत राजनीतिक प्रमाण उपलब्ध करबैत अछि। जगदीश प्रसाद मंडलक अगिला उपन्यास उत्थान-पतन एहि उपन्यासक माध्यमे सामंती सोचकबला समाज आ समाजिक सोचक समाज बीच आधुनिक वैज्ञानिक समन्वयवादी सोचक यर्थाथ चित्रण तेहन मार्मिक आ इमानदारीसँ मंडलजी केलनि अछि जे एक तेहन राजनीतिक चेतनाक संवाहक बनैए जे प्रत्येक मनुखकेँ उत्थान आ पतनक मार्ग दर्शन रूपमे सिद्ध करैत अछि। ‘जीबन-मरन’ उपन्यासक लेखक जगदीश प्रसाद मंडल जी छथि- एहि उपन्यासक मूल पात्र छथि रघुनंदन। रघुनंदनक मृत्यु जइ दिन भेलनि ओही दिनसँ उपन्यासक प्रारम्भ होइत अछि। मिथिलाक समस्यामे बाढ़ि, रौदी आदि प्राकृतक समस्या केर अलाबे आर बहुत रास समस्या छैक जे मानव द्वारा अक्तियार क’ समाजकेँ जकरने छैक। प्रस्तुत विषय केर चित्रण ताहि रूपे मंडलजी अपन जीबन-मरन उपन्यासमे केलनि अछि जे एक खास राजनीतिक चेतनाक जन्म दैत अछि। हिनक अगिला उपन्यास अछि ‘जीवन-संघर्ष’ अध्यात्मक मूल उद्देश्य थिक मानव-मानवक बीच अगाध प्रेमक जन्म देनाइ जइसँ सभ कियो सहमत छी। प्रस्तुत उपन्यास जीवन-संघर्ष केर माध्यमसँ मंडलजी सम्प्रदाय आ धर्म कोना व्यक्तिसँ समाज धरिकेँ तोड़ैए आ कोना लोक अपनाकेँ महामानवक वाटपर चलि सकैए ताहि परिपेक्ष्यमे चित्रण भेल अछि ओ एक अद्भुत राजनीतिक चेतनाक द्योतक अछि। निष्कर्षत: ऐ सभ उपन्यासमे जीवन आ राजनैतिक चेतना समाहित अछि। लोकक कार्यक प्रति मण्डल जीक विश्वास जिनगीक प्रति विश्वास बिनु राजनैतिक चेतनाक सम्भव नै।

श्री गजेन्द्र ठाकुर जीक उपन्यास- सहस्रबाढ़नि ढेर रास रजनैतिक आ ब्यूरियोक्रेटिक उथाल-पुथलक गबाह अछि, तँ हुनकर सहस्रशीर्षा दलित गबैय्या मोहनक भारतक स्वतंत्रतासँ सूचनाक अधिकार धरि गीतक माध्यमसँ राजनैतिक चेतना पसारबाक अद्भुत सफल प्रयास अछि, तँ एकर बीचमे सन्हिआएल गामक आ बाढ़िक राजनीति गामसँ दिल्ली धरि पसरल अछि।

राजदेव मण्डल जीक ‘हमर टोल’ धारावाहिक रूपेँ विदेहमे ई-प्रकाशित भऽ रहल अछि आ ई मैथिलीक सभसँ बेसी पठित उपन्यासक रूपमे उभरि रहल अछि। ओना तँ ई उपन्यास अखन छपिये रहल अछि मुदा घृणा आ प्रेम दुनूसँ सराबोर राजनैतिक घटनाक्रमक लेखक द्वारा जे प्रस्तुतीकरण भऽ रहल अछि से अतुलनीय अछि।

केदारनाथ चौधरी- जीक चमेलीरानी आ एकर सेक्वेल माहुर वर्तमान राजनैतिक स्थितिक सुन्दर प्रस्तुतिकरण अछि आ अपराधीक राजनीतिमे प्रवेशक सुन्दर विवरण अछि, जतए पाठक चमेलीरानीसँ प्रेम करए लगैए आ ओकर अपराधकेँ स्वीकृति करबा लेल विवश भऽ जाइए।

आशा मिश्रक- उचाट आ अशोक कुमार ठाकुरक निशांत आ वसुधाक संसार सेहो ठाम-ठीम एकर विवरण करैत अछि।

श्याम चन्द्रक "रूपा दीदी" लेखकक कलाक प्रति उदासीनतासँ ओतेक निस्सन प्रभाव उत्पन्न नै करैए मुदा विषय-वस्तुक दृष्टिए ई राजनैतिक चेतनाकेँ आधार लऽ लिखल गेल अछि।

साकेतानन्दक सर्वस्वान्त बाढ़ि आ राहतक राजनीतिक डोक्यूमेन्ट्री फिक्शन अछि।

अनिलचन्द्र ठाकुरकआब मानि जाउ उपन्यासमे एक एहन युवतीक संघर्ष-गाथा अंकित अछि जे अपन लगनसँ जीवन बदलैत अछि। असंख्य गामक ई कथा कुलीनताक अधःपतनक कथा, संस्कार विहीनताक उद्घाटन आ भविष्यक पीढ़ीकेँ बचएबाक चेतौनी छी।

वीणा ठाकुरक ‘भारती’ उपन्यासमे सेहो राजनीतिक चेतना झलकैत अछि।

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