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वि दे ह

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य

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(c)२००४-१२.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

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जगदानन्द झा मनु
ग्राम पोस्ट- हरिपुर डीहटोल, मधुबनी

गजल

.गजल


घोड़ा जखन कोनो भऽ नाँगड़ जाइ छै
कहि ओकरा मालिक झटसँ दै बाइ छै

माए बनल फसरी तँ बाबू बोझ छथि
नव लोक सभकेँ लेल सभटा पाइ छै

घर सेबने बैसल मरदबा छै किए
चिन्हैत सभ कनियाँक नामसँ आइ छै

कानूनकेँ रखने बुझू ताकपर जे
बाजार भरिमे ओ कहाइत भाइ छै

खाए कए मौसी हजारो मूषरी
बनि बैसलै कोना कऽ बड़की दाइ छै

पोसाकमे नेताक जिनगी भरि रहल
जीतैत मातर देशकेँ मनु खाइ छै

(
बहरे रजज, मात्रा क्रम २२१२ तीन तीन बेर)

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.गजल


आइ सगरो गाममे हाहाकार छै
मचल एना ई किए अत्याचार छै

आँखि मुनने बोगला बैसल भगत बनि
खून पीबै लेल कोना तैयार छै

देखतै के केकरा आजुक समयमे
देशकेँ सिस्टम तँ अपने बेमार छै

देखते मुँह पाइकेँ कोना मुँह मोरलक
मांगि नै लेए खगल सभ बेकार छै

भरल भिरमे एखनो धरि एसगर छी
केकरो मनपर मनुक नै अधिकार छै


(
बहरे जदीद, मात्रा क्रम २१२२-२१२२-२२१२)



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.गजल

अहाँ पिआर करु हमरा हमर बसन्ती पिया
अपन बाबूक नहि हम आब रहलहुँ धिया

बहुत जतनसँ सोलह बसन्त सम्हारलहुँ
आब नहि सहल जाइए हमर टूटेए हिया

नेह रखने छी नुका कए कोंढ़ तर अहाँ लए
रुकि नहि जुलूम करु हमर तरसेए जिया

आब आँकुर फूटल पिआरक अछि चारू दिस
अहाँ जे रोपलौं करेजामे हमर प्रेमक बिया

आउ हमरा सम्हाइर लिअ हमर सिनेहिया
अहाँकेँ सप्पत दै छी करियौ नै मनु एना छिया

(
सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१८)



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.गजल


खाल रंगेल गीदड़ बड्ड फरि गेलै
एहने आइ सभतरि ढंग परि गेलै

घुरि कऽ इसकूल जे नै गेल जिनगीमे
नांघिते तीनबटिया सगर तरि गेलै

देखलक भरल पूरल घर जँ कनखी भरि
आँखि फटलै दुनू डाहेसँ मरि गेलै

सभ अपन अपनमे बहटरल कोना अछि
मनुखकेँ मनुख बास्ते मोन जरि गेलै

बीछतै मनु करेजाकेँ दरद कोना
जहरकेँ घूंट सगरो पी कऽ भरि गेलै

(
बहरे मुशाकिल, मात्रा क्रम २१२२-१२२२-१२२२)



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.गजल


लुटेए गाम गाबेए कियो लगनी
किए लागल इना सभकेँ शहर भगनी

कियो नै सोचलक परदेश ओगरलक
भऽ गेलै गामपर माए किए जगनी

उठेलहुँ बोझ हम आनेक भरि जिनगी
अपन घरमे रहल सदिखन बसल खगनी

बिसरलहुँ सुधि सगर कोना कऽ हम हुनकर
बनेलहुँ अपन जिनका हम घरक दगनी

अपन जननी जनमकेँ भूमि नै बिसरल
भरल बाँकी तँ अछि सभठाम मनु ठगनी

(
बहरे हजज, मात्रा क्रम १२२२ तीन तीन बेर सभ पांतिमे)

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