वि दे ह विदेह Videha बिदेह http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
Read in your own scriptRoman(Eng)
Gujarati
Bangla
Oriya
Gurmukhi
Telugu
Tamil
Kannada
Malayalam
Hindi
नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।
१. संपादकीय
विदेहक सएम अंक
( सम्पादकीय
उमेश
मण्डल, सह-सम्पादक, बेरमा,
तमुिरया, मधुबनी।)
१
मैथिलीमे ई-पत्रकारिता- उमेश मंडल
ई-पत्रकारिताक प्रारम्भ भेने लेखक ओ पाठक वर्गमे काफी वृद्धि देखल जाइत अछि। एकर अनेक कारणमे महत्वपूर्ण अछि भौगोलिक दूरीक अंत। जइसँ विश्वमे पसरल मैथिली भाषी, साहित्य प्रेमी सभ सोझा एलाह। ऐठाम अपन विचार व्यक्त करबाक पूर्ण स्वतंत्रा लेखको आ पाठकोकेँ भेटैत छन्हि। रचनापर त्वरित टिप्पणी-समीक्षा-समालोचनाक सुविधा सेहो इन्टरनेटपर अछि।
इन्टरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थितिक रूपमे विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" ५ जुलाइ २००४ सँ http://gajendrathakur.blogspot.com/ लिंकपर उपलब्ध अछि। ओना याहू जियोसिटीजपर २००० ईं.सँ ई साइट रहए, जे याहू द्वारा जियोसिटीज बन्द कऽ देलाक बाद आब उपलब्ध नै अछि। मैथिली ई-पत्रकारिताक आरम्भक श्रेय विदेहकेँ छै आ तँए एकर नाओं अछि ‘विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका’ वर्तमानमे ९९म अंक ई-प्रकाशित अछि। १५ फरवरी २०१२केँ १००म अंक ई-प्रकाशित होएत। गूगल एनेलेटिक्स डेटा केर मोताबिक ‘विदेह ई पत्रिका’केँ ५ जुलाइ २००४ई.सँ अखन धरि ११६ देशक १,५०२ ठामसँ ७२,०४३ गोटे द्वारा ३५,४५२ विभिन्न आइ.एस.पी. सँ ३,३६,७०७ बेर देखल गेल अछि।
विदेह मैथिली पोथी डाउनलोड http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi पर उपलब्ध अछि। लगभग २०० सँ बेशी मैथिली पोथी देवनागरी, तिरहुता आ ब्रेल तीनू लिपिमे जे पी.डी.एफ. फाइलमे फ्री डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि अनेक रचनाकारक अलाबे जगदीश प्रसाद मंडलक 2टा कथा संग्रह, 2टा एकांकी संग्रह, 3टा नाटक, 2टा कविता संग्रह, पाँचटा उपन्यासक सेहो उपलब्ध अछि। एकर अतिरिक्त ११००० सँ बेशी, तिरहुतामे लिखल, ५०० बर्ख पुरान तालपत्र, विदेह द्वारा स्कैन कऽ ओकर देवनागरी लिप्यंतरणक संग ऐ साइटपर डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। सरकारी आ गएर सरकारी संस्था सभ द्वारा अखन धरि कएल समस्त प्रयाससँ ई लगभग १०० गुणा बेसी अछि। ऐ समस्त कार्यमे लगभग १०,००० घण्टाक श्रम लगाओल गेल अछि आ एतए तिरहुता, ब्रेल आ अन्तर्राष्टीय फोनेटिक अल्फाबेट (आइ्. पी. ए) सिखबाक सेहो बेबस्था कएल गेल छै आ तइ संबंधी पोथी जे श्री गजेन्द्र ठाकुर द्वारा िलखित अछि ओ फ्री डोनलोड लेल सेहो उपलब्ध अछि।
विदेह मैथिली ऑडियो संकलन http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio, एतए विविध विधाक ऑडियो जेना कथा, कविता, गजल, हाइकू, टनका, हैबून, हैगा इत्यादि, देल गेल अछि। ऐठामक मुख्य आकर्षण अछि ५० घण्टाक ऑडियो संकलन जे मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीत जे मैथिलीकेँ जाति आधारित भाषा हेबाक अवधारणापर मारक प्रहार सिद्ध कए रहल अछि।
मैथिली वीडियोक संकलन http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video, एतए नाटक, सेमीनार, वर्षकृत्य, रसनचौकी, सामा-चकेबा, कवि-सम्मेलन, विदेहक नाट्य आ साहित्य उत्सवक वीडियो, मिथिलाक खोज, गीत-ंसंगीत, मैथिली वीडियो, वोकल आर्काइव, सगर राति दीप जरए, साक्षात्कार, विद्यापति पर्व, मैथिली गजल आदिक वीडियो उपलब्ध अछि। ऐठामक मुख्य आकर्षण अछि, मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीतक वीडियो, आ पहिल बेर विदेहक सौजन्यसँ सतमा कक्षाक दीक्षा भारतीक गाओल ‘गोविन्ददास’क गीत। ऐमे लगभग ५००० घण्टाक मेहनति विदेहक सदस्यगण द्वारा लगाओल गेल अछि।
विदेह मिथिला चित्रकला/आधुनिक चित्रकला आ चित्र- http://sites.google.com/a/videha.com/ videha-paintings-photos/ लिंकपर उपलब्ध अछि ‘मिथिला चित्रकला, आधुनिक चित्रकला, रंगमंच, चौबटिया-सड़क नाटक सहित कएक हजारसँ ऊपर फोटो अछि जइमे २०० सँ ऊपर िमथिलाक वनस्पति, १०० सँ ऊपर मिथिलाक जीव-जन्तु आ १०० सँ ऊपर मिथिलाक जनजीवनक किसानी आ कारीगरी संस्कृतिक फोटो सेहो अछि जइमे ५००० घण्टाक मेहनति विदेह सदस्यगण द्वारा लगाओल गेल अछि।
विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ पर मैथिलीक सभ वेबसाइटक विवरण सहजताक लेल उपलब्ध अछि।
विदेह द्वारा मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित कए http://madhubani-art.blogspot.com/ साइटपर राखल गेल अछि। एतए सत्तरिटा पोस्ट अछि जकरा माध्यमसँ मैथिलीक श्रेष्ठ साहित्य विश्वक समक्ष राखल गेल अछि। ऐ अनुवादमे लगभग ७०० घण्टासँ बेसी समैक श्रम खर्च कएल गेल अछि।
विदेह:सदेह- पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ ई मैथिली भाषाक मिथिलाक्षरमे सज्जित पहिल वेबसाइट अछि।
विदेह:ब्रेल- मैथिली ब्रेलमे : पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ पर मैथिलीक पहिल साइट अछि जे क्रमश: मिथिलाक्षर आ ब्रेलमे अछि जेकारा स्पेशल स्क्रीन टच माॅनिटरसँ संबंधित आदमी पढ़ि सकै छथि तहिना स्पेशल प्रिंटरसँ प्रिंट सेहो निकालि सकै छथि। जइ दुनूमे लगभग हजार-हजार (१०००-१०००) घण्टाक मेहनति लागल अछि।
नेना भुटका साइट मैथिलीमे बच्चा सबहक लेल एक मात्र साइट अछि जे संगीतज्ञ माँगनि खबासक नामपर- http://mangan-khabas.blogspot.com/ राखल गेल अछि। बाल साहित्य जेना बाल कथा, प्रेरक कथा, बाल कविता आदि समस्त बाल साहित्यकेँ आधुनिक-वैज्ञानिक दृष्टकोणसँ लिखल श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक १२५ गोट प्रेरक कथाक अलाबे विभिन्न लेखक केर साहित्य ऐपर सहजताक संग उपलब्ध अछि जेकरा विश्वमे पसरल नेना, बढ़ैत नेना आ किशोरक लेल फ्री डॉनलोड हेतु उपलब्ध अछि।
विदेह रेडियो: मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट- ऐठामसँ मैथिलीमे गीत-संगीत, कथा-कविता, गजल-हाइकू, टनका-हैबूनक संग अनेक परिचर्चा प्रसारित कएल जाइत अछि। साइटक नाओं अछि- http://videha123radio.wordpress.com/
विदेहक फेसबुक चौबटिया- http://www.facebook.com/groups/videha/ ऐ चौबटियापर ७७००सँ बेसी मैथिली भाषी सदस्य द्वारा गत एक सालमे १०,००० पोस्ट आ ११०० सँ बेसी फोटो पोस्ट कएल गेल अछि। प्रतिदिन १५० टासँ ऊपर कॉमेट पोस्ट सभपर अबैए जइमे मिथिला-मैथिली विकासपर स्वस्थ्य परिचर्चा होइए।
विदेह मैथिली नाट्य उत्सव- मैथिली रंगमंचकेँ वैश्विक स्तर प्रदान केलक अछि जे श्री बेचन ठाकुरजी द्वारा http://maithili-drama.blogspot.com/ पर उपलब्ध अछि। एतए मैथिली आ अंग्रेजीमे मैथिली रंगमंचक चित्र-आ वीडियोक माध्यमसँ विस्तारसँ वर्णन १७५ पोस्टमे देलगेल अछि, ई मैथिलीक अखन धरिक “स्लैपस्टिक ह्यूमर” बला रंगमंचक विरुद्ध विदेह मैथिली समानान्तर रंगमंचक प्रारम्भ केलक अछि। लगभग २००० घण्टाक मेहनति ऐ वेबसाइटपर अखन धरि भऽ चुकल अछि। एतए मिथिलाक गम-गाममे होइत मैथिली रंगमंचक अतिरिक्त, कोलकाता, जनकपुर, राजबिराज, पटना, दिल्ली आदिक रंगमंचक विवरण सेहो उपलब्ध अछि।
समदिया- http://esamaad.blogspot.com/ पर पूनम मण्डल आ प्रियंका झा द्वारा २००४ ई.मे शुरू भेल, साहित्यिक पत्रकारिताक लीकसँ हटि कऽ न्यूज पोर्टलक वा ई-पेपरक रूपमे मैथिली पत्रकारिताकेँ एतएसँ प्रारम्भ भेल। अखन धरि ५२५ सँ बेसी पोस्ट ऐठाम भेल अछि। सर्वश्रेष्ठ न्यूजकेँ मासक समदिया पुरस्कार देल जाइत अछि। अगस्त २०१२मे सर्वश्रेष्ठ मैथिली पत्रकारकेँ ‘विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान’सँ सम्मानित करबाक घोषणा अछि जे आब साले-साल सेहो देल जाएत। ऐ वेबसाइटपर अखन धरि ५५०० घण्टाक मेहनति पूनम मण्डल आ प्रियंका झा टाइपसँ लऽ कऽ समाचार अपलोड करबाक कार्यमे कऽ चुकल छथि आ ई साइट श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमरक सीरियल चोरिक भण्डाफोड़क अतिरिक्त ढेर रास उद्घाटन कऽ साहसिक सोद्देश्य मैथिली पत्रकारिताक परिचए दऽ चुकल अछि।
मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ श्री गजेन्द्र ठाकुर, श्री बेचन ठाकुर, श्री विनीत उत्पल, श्री सुनील कुमार झा आ श्री आशीष अनचिन्हार द्वारा संचालित साइट अछि, ऐपर मैथिली, अंगिका, वज्जिका आ सुरजापुरीक पूर्ण विवरण उपलब्ध अछि। एतए अखन पचाससँ ऊपर पोस्ट उपलब्ध अछि।
अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/- एेपर ४८१टा गजल, २२टा कता, बन्द, नात, १२४टा रुबाइ, ७०टा करीब आलेखक अलाबे शेरो-शाइरीसँ संबंधित विडियो सेहो उपलब्ध अछि।
मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/- ऐ वेबसाइट मैथिलीक साहित्यिक पत्रकारिताक प्रतिमान प्रस्तुत करैत अछि। मैथिली हाइकू (प्राकृत दृश्यपर ५/७/५) टनका (प्राकृत दृश्यपर ५/७/५/७/७) हैबून (प्राकृत दृश्यपर गद्यक एक-दू या तीन अनुच्छेदक अंतमे ओतबे हाइकू या टनका) हैगा (तत् संबंधी चित्र), शेनर्यू आदिक थ्योरी आ प्रैक्टिस सभ एतए भेट जाएत।
मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/- ऐ वेबसाइटपर मैथिलीक अन्तर्जालपर मानकीकृत स्वरूप नेपाल आ भारतक मैथिली भाषाशास्त्री लोकनिक मतक अनुसार। मैथिलीक साहित्यिक पत्रकारिताक प्रतिमान प्रस्तुत करैत अछि।
निष्कर्षत: ऐ ई-पत्रकारितामे साहित्यिक आ राजनैतिक दुनू पत्रकारिता शामिल अछि जतए, दृश्य आ श्रव्य माध्यमक प्रचुर प्रयोग कएल गेल अछि।
२
िनर्मली,
सुपौल, (बिहार)- मििथलांचलक
प्राथमिक आ मध्य विद्यालयी शिक्षाक माध्यम् मैथिली हेतु ‘विदेह’
विचार गोष्ठी श्री राहुल कुमार जीक संयोजकत्वमे
स्थानीय अशर्फी दास साहु समाज इण्टर महिला कॉलेज परिसरमे दुपहर 2 बजेसँ
कएल गेल जेकर अध्यक्षता केलनि- उपन्यासकार श्री जगदीश प्रसाद मण्डल,
दीप प्रज्वलन सह गोष्ठीक उद्घाटन केलनि िनर्मली
महाविद्यालयक इतिहास विभागक वरीय व्याख्याता प्रो. जयप्रकाश साह,
संचालन प्रो. हेम नारायण साह।
प्रो. कपिलेश्वर साह, मरौना केर पूर्व जिला पार्षद श्रीमती आशा देवी, अधिवक्ता रामलखन यादव, कवि श्री राजदेव मण्डल, अधिवक्ता वीरेन्द्र कुमार ‘विमल’ विशिष्ठ अतिथि रहथि।
ऐ अवसरपर उपस्थित छलाह िनर्मली महाविद्यालय िनर्मलीक मैथिली विभागक वरीय व्याख्याता प्रो. श्रीमोहन झा, प्रो. मुकुल कुमार वर्मा, श्री विनय कुमार रूद्र, अधिवक्ता भोला प्रसाद यादव, अवकाश प्राप्त शिक्षक श्रीकृष्ण राम, िनर्मली महाविद्यालय केर हिन्दी विभागक वरीय व्याख्याता डॉ. शिवकुमार प्रसाद, प्रो. उपेन्द्र अनुपम, साहित्यकार नन्द विलास राय, मध्य विद्यालय िनर्मलीक प्रधानाध्यापक सत्य नारायण कामति, शिक्षक रामावतार साहु, शिक्षक अहमद कमाल मंजूर, मध्य विद्यालय िनर्मलीक सहायक शिक्षक जवाहर लाल गुप्ता, प्रो. सुशील कुमार, गणित विभागक व्याख्याता प्रो. दुर्गालाल साहु, इण्टर महिला कॉलेजक प्राचार्य प्रो. मनोज कुमार साह, भौतिकी विभागक प्रो. लालबाबू साह, रामप्रकाश सिंह, जितेन्द्र प्रसाद यादव, चुन्नीलाल साह, मदन प्रसाद साह, विष्णुदेव कुमार मंडल, विनोद कुमार साह, मुकुल साह, डीलर यदुराम, पुनित लाल साहु, देवराम साह, वीरेन्द्र ठाकुर, चन्द्रशेखर मंडल जलेश्वर प्रसाद साहु आदि।
सर्वसम्मतिसँ िनर्णय भेल माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जीकेँ जे कोसी महासेतुक उद्घाटन लेल 08 फरवरी 2012केँ िनर्मली आबि रहलाहेँ ओही अवसरपर उपरोक्त विषय-वस्तुक स्मार पत्र प्रदान कएल जाए जइमे अधिक-सँ-अधिक लोकक हस्ताक्षर रहए।
तै अनुसार स्मार-पत्र देल गेल http://esamaad.blogspot.in/2012/02/blog-post_08.html
[-जयकांत मिश्रक याचिका (CWJC No. 7505/98) पर बिहार सरकार हाई कोर्टमे सेहो हारल छल
-मुदा बिहार सरकार सुप्रीम कोर्टमे केने छल अपील (Civli Appeal No. (s)7266 of 2004, न्यायमूर्ति बी.सुदर्शन रेड्डी आ सुरिन्दर सिंह निज्झर ३० सितम्बर २०१० केँ सुनवाइ केलन्हि आ अपन निर्णयमे बिहार सरकारक अपील ठोकरा देलक।
-बिहार आ झारखण्डक भागमे [बिहारक सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, खगड़िया, बेगूसराय, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, वैशाली (हाजीपुर), मुंगेर, बाँका, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, मोतीहारी, किशनगंज, आ कटिहार जिला आ रिटक समय १९९८ ई. मे बिहार मुदा आब झारखण्डक देवघर, गोड्डा आ साहेबगंज जिला] मैथिली अलग भाषा रूपमे बाजल जाइत अछि। जँ वर्गमे कमसँ कम १०टा छात्र आ स्कूलमे ४० टा छात्र मैथिली माध्यमसँ शिक्षा प्राप्त करऽ चाहताह तँ सरकारकेँ से व्यवस्था करए पड़तैक।]
[बिहार मे मिथिलांचल क्षेत्रमे प्राथमिक आ मध्य विद्यालयी शिक्षाक माध्यम मैथिली करबा लेल बिहार सरकारपर द्वाब बनेबा लेल ३ फरबरी २०१२ केँ विदेह द्वारा विचार गोष्ठीक आयोजन कएल जा रहल अछि आ संगमे हस्ताक्षर अभियान सेहो शुरू कएल जाएत, आ ८ फरबरी २०१२ केँ मुख्यमंत्री नीतिश कुमारकेँ ज्ञापन देल जाएत। श्री राहुल कुमार आ श्री अमरेन्द्र कुमार साहक संयोजकत्वमे विदेह विचार गोष्ठी ३ फरबरी २०१२ केँ २ बजे अपराह्णसँ अशर्फी दास साहू समाज इण्टर महिला महाविद्यालय, निर्मली (जिला सुपौल) मे आयोजित हएत। सुप्रीम कोर्ट सेहो बिहार सरकारक अपीलकेँ खारिज कऽ देने अछि आ कोनो बाधा नै बचल अछि (http://esamaad.blogspot.in/2011/11/blog-post_14.html ) बिहारक मुख्यमंत्रीकेँ १४ अक्टूबर २०११केँ श्री जगदीश प्रसाद मण्डल आ श्री राजदेव मण्डलक ६ टा पोथी देल गेल छलन्हि आ ई मुद्दा उठाओल गेल छल (http://esamaad.blogspot.in/2011/10/blog-post_15.html)]
[Indian Constitution has given special importance to primary education through the mother tongue. Article 350(A) of the Constitution spells out:
"It shall be the endeavour of every State and of every local authority within the state to provide adequate facilities for instruction in the mother tongue at the primary stage of education to, children belonging to linguistic minority groups; and the President may issue such directions to any State as he considers necessary or proper for securing the provision of such facilities."]
३
नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२
अभिनय- मुख्य अभिनय ,
सुश्री शिल्पी कुमारी, उम्र- 17 पिता श्री लक्ष्मण झा
श्री शोभा कान्त महतो, उम्र- 15 पिता- श्री रामअवतार महतो,
हास्य-अभिनय
सुश्री प्रियंका कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री वैद्यनाथ साह
श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पिता- स्व. भरत ठाकुर
नृत्य
सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री हरेराम यादव
श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पिता- नागेश्वर कामत
चित्रकला
श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना
श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पिता- श्री मोती मण्डल
संगीत (हारमोनियम)
श्री परमानन्द ठाकुर, उम्र- 30, पिता- श्री नथुनी ठाकुर
संगीत (ढोलक)
श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पिता- स्व. चिल्टू राउत
संगीत (रसनचौकी)
श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पिता- स्व. सरजुग राम
शिल्पी-वस्तुकला
श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज
मूर्ति-मृत्तिका कला
श्री यदुनंदन पंडित, उम्र- 45, पिता- अशर्फी पंडित
काष्ठ-कला
श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना
किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति
श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा
( सम्पादकीय
उमेश
मण्डल, सह-सम्पादक, बेरमा,
तमुिरया, मधुबनी।)
( विदेह ई पत्रिकाकेँ ५ जुलाइ
२००४ सँ
अखन धरि ११६ देशक १,५०२ ठामसँ
७२,०४३ गोटे द्वारा
३५,४५२ विभिन्न
आइ.एस.पी. सँ ३,३६,७०७ बेर देखल गेल अछि; धन्यवाद पाठकगण। - गूगल
एनेलेटिक्स डेटा। )
गजेन्द्र
ठाकुर
http://www.maithililekhaksangh.com/2010/07/blog-post_3709.html
२. संदेश-
[ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक
सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह
(सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य
(त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम्
अंतर्मनक मादेँ। ]
१.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक
लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ।
सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन
भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत।
२.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन
मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक
हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी।
३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी
ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता
आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक
मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे
आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत।
४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक
दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट
मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल
अभिनन्दन।
५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन,
मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक
अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक
पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ।
मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन भव्य अवतारक पोथी थिक।
हर्षपूर्ण हमर हार्दि बधाई स्वीकार करी।
६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय
वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि।
७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली
पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू।
८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम ैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क
प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि
जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना।
९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक
क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि।
पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क
सफलताक शुभकामना।
१०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक
प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक
अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत-
यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।
११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ,
सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना
स्वीकार कएल जाओ।
१२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल।
’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना
अछि।
१३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना।
हमर पूर्ण सहयोग रहत।
१४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर
कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा
शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल।
मैथिलीक लेल ई घटना छी।
१५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी।
मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला
रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी।
१६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल
छी, नातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अंक जखन प्रिंट निकालब तँ हमरा
पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ
होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल।
शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम्
अंतर्मनक लेल बधाइ। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे। मुदा
अहाँक सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी
सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक। (स्पष्टीकरण-
श्रीमान्, अहाँक सूचनारथ विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री
आर्काइवमे
https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ पर बिना मूल्यक
डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो
प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि
ताहिपर हमर कोनो नियंत्रण नहि अछि।- गजेन्द्र ठाकुर)... अहाँक प्रति अशेष
शुभकामनाक संग।
१७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह"
प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ
मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ
सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल।
१८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल।
विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त
विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम्
अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई।
१९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे
तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक
गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत।
२०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ
निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक
दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी
सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक
छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ।
२१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता,
कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि-
बधाई स्वीकार कएल जाओ।
२२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु
समालोचना मरखाह..मुदा सत्य।
२३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम
अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि।
अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक
बधाई।
२४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर
शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास,
बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य
दृष्टिगोचर होइत अछि।
२५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे हमर उपन्यास स्त्रीधनक
जे विरोध कएल गेल अछि तकर हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक
पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए।-गजेन्द्र
ठाकुर)
२६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि
मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से
आह्लादित कएलक।
२७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली
साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत।
२८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक
छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित
भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी।
२९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट
फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल
प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना।
३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत
काज कऽ रहल छी।
३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि
उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि।
३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि
गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई।
३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना
उच्चकोटिक लागल। बधाई।
३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक
लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई।
३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, िशालकाय संगहि
उत्तमकोटिक।
३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा
प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा
अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ।
३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज
उत्तम।
३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय,
विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना।
३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ
तरहेँ।
४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ
कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल।
४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत
मेहनतिक परिणाम। बधाई।
४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि,
मैथिली साहित्य मध्य।
४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि,
शुभकामना।
४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ
बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो
उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे
तँ सभ विधा समाहित अछि।
४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि
शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक।
४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि
सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ
सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत।
४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आ्लादित भऽ
रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे
विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे
दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि।
४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रशंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली
साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत।
४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि
अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना।
५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल
देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना।
५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम्
अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली
नहि मरत। अशेष शुभकामना।
५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखि, ओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता
भेल।
५३.श्री मानश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति
प्रसन्नता भेल, एतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना
भविष्यमे काज करैत रही, शुभकामना।
५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तार,
छपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक अनेक धन्यवाद; कतेक बरखसँ
हम नेयारैत छलहुँ जे सभ पैघ शहरमे मैथिली लाइब्रेरीक स्थापना होअए, अहाँ
ओकरा वेबपर कऽ रहल छी, अनेक धन्यवाद।
५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल
एहि तरहक पहिल प्रयोग अछि, शुभकामना।
५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछि,
बहुत मार्मिक छल।
५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखल, बधाई।
५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक
हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि।
५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि
जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी।
६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्ग,
एकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि।
६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखल, बहुत नीक। एखन किछु
परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब।
६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ
साधुवादक अधिकारी छी।
६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश
आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ
प्रसन्न रही।
६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ
उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे
सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछि, से चकित कएलक, एहि संग्रहक कथा-उपन्यास
मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक
नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछि, से प्रशंसनीय।
६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल
बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना।
६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे
अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास
सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा
रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय।
६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित ‘विदेह’आ
‘कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि
अहाँक सम्पादनमे? एहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह।
६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजी, अपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम्
अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल , हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना ।
६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि
गदगद आ नेहाल भेलहुँ।
७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथली
गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे
मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल
अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि
जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक
द्वारे, एहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख
सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक)
७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम्
अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य
अतुलनीय अछि।
७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र
ग्रन्थ अछि, एहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक
फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि।
७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ
अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागल, अहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा
अछि।
७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले
अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना।
७५.प्रोफेसर कमला चौधरी- मैथिलीमे कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सन पोथी आबए जे
गुण आ रूप दुनूमे निस्सन होअए, से बहुत दिनसँ आकांक्षा छल, ओ आब जा कऽ
पूर्ण भेल। पोथी एक हाथसँ दोसर हाथ घुमि रहल अछि, एहिना आगाँ सेहो अहाँसँ
आशा अछि।
७६.श्री उदय चन्द्र झा "विनोद": गजेन्द्रजी, अहाँ जतेक काज कएलहुँ अछि से
मैथिलीमे आइ धरि कियो नहि कएने छल। शुभकामना। अहाँकेँ एखन बहुत काज आर
करबाक अछि।
७७.श्री कृष्ण कुमार कश्यप: गजेन्द्र ठाकुरजी, अहाँसँ भेँट एकटा स्मरणीय
क्षण बनि गेल। अहाँ जतेक कज एहि बएसमे कऽ गेल छी ताहिसँ हजार गुणा आर बेशीक
आशा अछि।
७८.श्री मणिकान्त दास: अहाँक मैथिलीक कार्यक प्रशंसा लेल शब्द नहि भेटैत
अछि। अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सम्पूर्ण रूपेँ पढ़ि गेलहुँ।
त्वञ्चाहञ्च बड्ड नीक लागल।
७९. श्री हीरेन्द्र
कुमार झा- विदेह ई-पत्रिकाक सभ अंक ई-पत्रसँ भेटैत रहैत
अछि। मैथिलीक ई-पत्रिका छैक एहि बातक गर्व होइत अछि। अहाँ आ अहाँक सभ
सहयोगीकेँ हार्दिक शुभकामना।
कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर

गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा,
उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प
गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ
बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे।
कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७
Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to
VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and
Children-grown-ups literature in single binding:
Language:Maithili
(Details for purchase available at print-version publishers's site
http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com )
