Bhaktamar Stotra
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Bhaktamar Stotra : Anuradha Paudwal
Bhaktamar Stotra : Manhar Udhas
जैनधर्ममां भक्तामर स्तोत्र एक शास्त्र जेटलो ज आदर धरावे छे. तेनी रचना मुनि मानतुंगाचार्यजीए करी हती. भक्तामर स्तोत्रनी रचना विशे विविध मतो प्रवर्ते छे. एक मान्यता मुजब राजा भोजना दरबारमां जैन विद्वान कवि धनंजये पोतानी विद्वताथी राजाने प्रभावित कर्या. कवि कालीदासथी ए सहन न थयुं. एथी पोतानी सर्वोपरिता सिद्ध करवा कालीदासे राजाने बंने वच्चे वादविवाद कराववा कह्युं. जेमां कवि कालीदासनी हार थई. परंतु हार स्वीकारवाने बदले एमणे कह्युं के हुं धनंजयना गुरु मानतुंगमुनि साथे वादविवाद द्वारा मारी विद्वत्ता सिद्ध करीश.
एथी राजाए मानतुंगमुनिने शास्त्रार्थ माटे निमंत्रण मोकल्युं. राजाए वारंवार कहेण मोकल्या छतां मानतुंगमुनि राजदरबारमां हाजर न थया त्यारे राजआज्ञानो अनादर करवा बदल एमने बंदी बनावी कारागारमां पूरवामां आव्या. कारावासमां भगवान आदिनाथनुं चिंतन करीने मुनिए स्तुति करी. एना परिणामे एमना बेडीना ताळां तूटी गया अने तेओ मुक्ति पाम्या. आ प्रसंगने परिणामे चोतरफ जैन धर्मनो जयजयकार थई रह्यो. बंधनावस्थामां तेमणे करेली स्तुति भक्तामर शब्दथी शरू थती होई ए भक्तामर स्तोत्रना नामे प्रसिद्ध थई.
