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गागरमां सागर

स्वर - संगीत : नयनेश जानी

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मारी हथेळीना दरियामां मे तो तरतुं मुकेल तारुं नाम
श्वासोमां भरवानो गुलम्होरी रंग हवे वेदनामां भळतो आराम

हथेळी ना दरियाने दर्पण मानीने
तारा चहेराने शोधवा हुं नीकळ्यो,
आंगळीथी चीतरेला अक्षरने लाग्युं के
रोमरोम तारामां पीगळ्यो

दरियो हथेळीनो घूघवे एवो के जाणे लहेरोनो रेतमां मुकाम
मारी हथेळीना दरियामां मे तो तरतुं मुकेल तारुं नाम

मनगमतां नामने उमर ना होय
ए तो गमे त्यारे हाथ पर लखाय,
मोसमने जोइने फूलना खीले
एना खीलवानी मोसम बदलाय

अंदरथी बदलाती मोसमनां सम तारा हाथमां छे मारी लगाम
मारी हथेळीना दरियामां मे तो तरतुं मुकेल तारुं नाम.

- अंकित त्रिवेदी

स्वर - संगीत : सोली कापडीया

(सुक्की जुदाइ……Lassen Volcanic National Park, CA - Sept 09)

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सूकी जुदाइनी डाळ तणां फूल अमे
छाना ऊगीने छाना खरीए
तमो आवो तो बे’क वात करीए…

फागण चाले ने एनां पगलानी धूळथी
निंदर ऊडे रे साव काची
जागीने जोयुं तो ऊडे सवाल, आ ते
भ्रमणा हशे के वात साची,

जीवतर आख्खुंय जाणे पांच सात छोकरां
परपोटा वीणता दरिये
सूकी जुदाइनी डाळ तणां….

केडीना धोरिये जंगल डूब्यां
ने अमे कांठे ऊभा रहीने गाता
राता गुलमहोरनी यादमां ने यादमां
आंसु चणोठी थइ जातां !

कोण जाणे केम हवे झाझुं जीरवाय नै,
मरवा दीये तो कोइ मरीये !

सूकी जुदाइनी डाळ तणां फूल अमे
छाना ऊगीने छाना खरीए
तमो आवो तो बे’क वात करीए…

गुजराती लिटररी ऍकेडेमी ओफ नोर्थ अमेरिका

TV Asia नां सहयोगथी

रजू करे छे…

अभिनय-सम्राट

श्री उपेन्द्र त्रिवेदी

साथे एक सांज…

अनेक अविस्मरणीय नाटको अने चलचित्रोना दिग्दर्शक अने अदाकार

श्री उपेन्द्रभाईए गुजराती साहित्यना कंई केटलाय पात्रोने

रंगभूमि अने रूपेरी परदा पर सजीवन कर्या छे.

साहित्यनी असामान्य समज धरावनार अने अस्खलित वहेती वाणीना मालिक आ कलाकार

आ कार्यक्रममां एमना जीवन अने कार्य विशे वार्तालाप आपशे.

दिवस : शनिवार, १ ऑक्टोबर २०११

समय : बपोरे बराबर ३:०० थी 6:00 वाग्या सुधी

स्थळ : TV Asia Auditorium, 76 National Road, Edison, NJ

कार्यक्रम विशे माहिती

राम गढवी ९७३-६२८-८२६९
रोहित पंड्या ७१८-७०६-१७१५

Driving Directions to TV Asia Auditorium, 76 National Road, Edison, NJ (Ph 732-650-1100)

· NJ Turnpike to exit 10

· Take I-287 North

· Exit 2-B to Rte. 27 South

· Past a couple of traffic lights, right on Talmadge Road

· Go about ½ mile, turn right on National Road

· About ¼ mile to TV Asia building on your left

गुजराती लिटररी ऍकेडेमी ओफ नोर्थ अमेरिका

रजू करे छे

सर्जको साथे सांज

अमेरिकामां वसीने लखता गुजराती सर्जकोने प्रोत्साहन आपवा

ऍकेडेमी फरी एक वार आ कार्यक्रम योजी रही छे.

आ कार्यक्रममां

पन्ना नायक, चंद्रकांत शाह (बोस्टन), अशोक विद्वांस, चंद्रकांत देसाई

अने बीजा सर्जको पोतानी कृतिओ रजू करशे.

दिवस : रविवार, १८ सप्टेम्बर २०११

समय : बपोरे बराबर ३:०० वागे

स्थळ : TV Asia Auditorium, 76 National Road, Edison, NJ

संचालन : हरनिश जानी

ताजी स्वरचित कृति रजू करवा इच्छता सर्जके संचालकनो नीचे मुजब संपर्क करवोः

फोनः ६०९-५८५-०८६१ (घर) ६०९-५७७-७१०२ (सेल)

ई-मेइल : harnish5@yahoo.com

कार्यक्रम विशे माहिती

राम गढवी ९७३-६२८-८२६९ |  रोहित पंड्या ७१८-७०६-१७१५

Driving Directions to TV Asia Auditorium, 76 National Road, Edison, NJ (Ph 732-650-1100)

· NJ Turnpike to exit 10

· Take I-287 North

· Exit 2-B to Rte. 27 South

· Past a couple of traffic lights, right on Talmadge Road

· Go about ½ mile, turn right on National Road

· About ¼ mile to TV Asia building on your left

आजे मारा व्हाला विशालना जन्मदिवस पर सांभळीए आ मझानुं  बाळगीत..!
Happy Birthday Vishal… Wish you a lot of fun today and always..!! … हेप्पी बर्थ डे बेटा! :)

view from top of the world...

(आ अमारो बचूडो….  )

स्वर : रूपांग खानसाहेब अने साथीओ
Music Arranger & Recording : मेहुल सुरती
Album : हसता रमता

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आ अमारो बचूडो अंग्रेजी भणवा जाय
कहे कदी ए हाय… Hi.., कदी कहे गुडबाय.. Bye
कोनी आगळ जईने कहीए अंग्रेजीनी ल्हाय

पोएट्री तो पट पट बोले, दादी नो देसी क्हान
स्वान कहे तुं हंसने, दादी समजे श्वान
द्हाडे द्हाडे त्रीजी पेढी दूर जती देखाय
कोनी आगळ जईने कहीए अंग्रेजीनी ल्हाय

मेघधनुषी गुर्जरभाषा केटला एना रंग
दादीमानी कहेवत सुणी दुनिया आखी दंग
पण अंग्रेजीथी रंगी दीधुं तें तो आखुं स्काय
कोनी आगळ जईने कहीए अंग्रेजीनी ल्हाय

तु अंग्रेजी बोले त्यारे दादाजी पण झूले
केम करी चाले रे बचूडा गुजराती जो भूले
भले होठे English हैये गुजराती सचवाय
कोनी आगळ जईने कहीए अंग्रेजीनी ल्हाय

तमे गयां ने आंगणिये लींपणमां पाडी
हथेळीओनी भात नथी कलबलती.

आंगण ढूक्यो मोर पाधरो
थीजी गयेली ओकळीओनी पांख नीरखी आभ जेवडो
एक निसासो नांखे;

सवारमां मुठ्ठी दाणा लइ
तमे वेरतां कलरव क्यां? ने केटकेटली कीकीओ एनी
आंखोमांथी शून्य वेरती ताके?

- अने छीबमां न्हाइ निरांते ऊछळी पडती
दीवाल पर ते सूरज केरी क्यां छे पेली माछलीओ झलमलती?

बपोरना ढळती नेवेथी उंबर पर
तडकानी लो आ करवत पाछी ओकळीयाळी पांख
व्हेराती चाली;

सांज पड्ये तुलसीने पानेपान ऊगता
सूरज आडे क्यांथी आंजु कणकणती बे
हथेळीओनी लाली ?

अंधारानुं पतंगियुं पण केम होलवे
वण प्रगटेला दीवा केरी शगने मारी आंखोमां हलबलती?

तमे गया ने….

- भीखु कपोडिया

आजे grand finale मां कंईक वधु स्पेश्यल… आजनुं गझलपठन तमने मात्र सांभळवा ज नहीं परंतु जोवा पण मळशे… द्रश्य अने श्राव्य, बंने ! विवेक थोडा समय पहेलां ज अमेरिकानां प्रवासे आव्यो हतो जेनी आप सौने जाण हशे ज. अमेरिकामां एना घणा कार्यक्रमो पण योजाया हता. न्यु जर्सीनां एनां GLA द्वारा योजायेला ‘शब्दने सथवारे‘ कार्यक्रम दरम्यान लीधेली विडीयो क्लिपमांथी आजे एक गझल प्रस्तुत छे, खास आप सौ माटे.

बधाना तारा विशेना खयाल नोखा छे.
जवाब नोखा छे सहुना, सवाल नोखा छे.

आ दर्दनी पळेपळना दलाल नोखा छे,
अमारा गीत-गझलना कमाल नोखा छे.

तमे पकडवा जशो कानथी तो नहीं पकडाय,
अमारा दर्द तणा सूर-ताल नोखा छे.

खरे छे आंखथी सौनी ए आंसु छे सरखां,
परंतु हाथमां सौना रूमाल नोखा छे.

बधा गतानुगतिक चित्तवृत्तिना छे शिकार,
उपर-उपरथी फकत हालचाल नोखा छे.

बधुं ज भ्रम छे हुं जाणुं छुं पण मनातुं नथी,
आ चंद श्वासना धांधल-धमाल नोखा छे.

रदीफ, काफिया ने छंद सहुने हांसिल छे,
कलम-कलममां परंतु कमाल नोखा छे.

-विवेक मनहर टेलर
(११-०९-२०१०)

बधुं ज भ्रम छे एनी बधाने खबर होवा छतां आजीवन धांधल-धमाल कर्ये राखवा ए पण जीवननी एक आगवी मजा ज छे ने…!

*

आम तो काव्यपठन सप्ताह आजे विराम ले छे… (विराम ज हों!) परंतु थोडा थोडा दिवसे जरूरथी आम ज मळता रहीशुं.

आजे सांभळीए, हैया सोंसरवुं ऊतरी जतुं एषानुं एक खूब ज लोकप्रिय अछांदस… एनां ज गळचट्टा अवाजमां.

daddy-girl

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दीकरीने अग्निदाह आप्यो,
ते पहेला ईश्वरने
बे हाथ जोडीने कह्युं हतुं,
सासरे वळावतो होउं एवी ज रीते
मारी दीकरीने विदाय करुं छुं,
ध्यान राखीशने एनुं?
अने पछी मारामां अग्निदाह देवानी ताकत आवी,
लाग्युं के ईश्वरे वेवाईपणुं स्वीकारी लीधुं…!
एने अग्निदाह आपीने पाछो फर्यो त्यारे पत्नीए
आंगणामां पाणी मूक्युं हतुं…
नाही नाखवानुं हवे दीकरीनां नामनुं…!
दीकरी विनानुं घर आजे दस दिवसनुं थयुं…
पत्नीनी वारेवारे भराई आवती आंखो
दीकरीना ड्रेसिंगटेबल अने छेल्लां दस दिवसथी
एकदम व्यवस्थित रहेलां एनां वोर्डरोब पर फरी वळे छे…
हुं पण त्यां जोउं छुं ने एक
निसासो नंखाय जाय छे…
ईश्वर, दीकरी सोंपता पहेलां तारा विशे
तपास कराववानी जरुर हती,
कन्यापक्षना रिवाजोने तारे मान आपवुं जोईए,
दस दिवस थई गयां…
अने अमारे त्यां पगफेरानो रिवाज छे…!!!

-एषा दादावाळा

आजे सांभळीए र.पा.नां एक गीतनुं पठन, एमनां अवाजमां एक विशिष्ट लहेका साथे…

vishn33

(हरी पर अमथुं अमथुं हेत…  फोटोः वेब परथी)

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हरी पर अमथुं अमथुं हेत,
हुं अंगुठा जेवडी ने मारी व्हालप बब्बे वेंत.

अमथी अमथी पूजा करुं ने अमथा राखु व्रत,
अमथी अमथी मंगळ गाउं, लखु अमस्तो खत;
अंगे अंगे अमथी अमथी अगन लपेटो लेप,
हरी पर अमथुं अमथुं हेत.

‘अमथुं अमथुं बधु थतुं ते तने गमे के नईं?’
एम हरीए पूछ्युं त्यारे बहु विमासण थई;
कोई बीजु पूछत तो एने झटपट ना कही देत,
हरी पर अमथुं अमथुं हेत.

- रमेश पारेख

अमथुं अमथुं ज गमी जाय एवुं हरिगीत… अने हरि पर निष्कारण अमथुं अमथुं हेत होय ए ज प्रेम अने भक्ति साची ने !

आजे मुकुलभाईनी एक गझलनुं पठन माणीए… मुकुलभाईनुं नाम आवे एटले लागणीथी लथबथ मने खूब्ब ज गमती एवी एमनी बे गझलो तरत ज याद आवी जाय; एक तो लोकप्रिय गझल ‘सजनवा’ अने बीजी चूमी छे तने.  ऊर्मिसागर.कॉमनी त्रीजी वर्षगांठ पर चूमी छे तनेगझलनुं पठन मुकुलभाईए खास मोकलाव्युं हतुं अने लयस्तरोनी चोथी वर्षगांठ वखते आ सजनवा-गझलनुं.  आजे ए ज मजेदार पठन अने मारी प्रिय सजनवा-गझल आजे अहीं फरी माणीए…!

मुकुलभाईने आ गझलनुं पठन करी आपवानी ज्यारे में फरमाईश करेली त्यारे में एमने बे सवालो पण पूछाव्या हता: १) तमे आ गझल आटली दीर्घ केम लखी?  २) आ गझल लखवा पाछळ शुं अने कोनी प्रेरणा हती ? …तो ‘सजनवा’नां थोडा शेरनां पठननी साथे मुकुलभाईए मारा सवालोनां जवाबो पण मोकलाव्या हता, पण ए हुं तमने नहीं कहुं…  ए तो तमारे जाते ज सांभळवां पडशे ! :)  हवे ‘सजनवा’नुं वधु विश्लेषण कर्या वगर मुकुलभाईनां मजेदार जवाबो अने एमणे पसंद करेला ‘सजनवा’नां थोडा शेरोने आपणे सांभळीए, माणीए अने ममळावीए…

amit-jayshree

(बे अमारा दृ्ग सजनवा, बे तमारा दृग सजनवा… फोटो: विवेक टेलर)

स्वर: मुकुल चोक्सी

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आजथी पत्रोने बदले लखजे नक्षत्रो सजनवा

खाली हो तो पाछी तारी ओढणी लई ले सजनवा
ने हाथ साथे हो तो किंमत सो गणी लई ले सजनवा

बे अमारा दृ्ग सजनवा, बे तमारा दृग सजनवा
वच्चेथी गायब पछी बाकीनुं आखु जग सजनवा

क्यां तो पीझानां मिनाराने हवे पाडो सजनवा
नहीं तो मारी जेम एने ढळता शिखवाडो सजनवा

सूर्य सामे एक आछुं स्मित कर एवुं सजनवा
थई पडे मुश्केल एने त्यां टकी रहेवु सजनवा

आभने पळमां बनावी दे तुं पारेवुं सजनवा
थई जशे भरपाई पृथ्वीनुं बधु देवुं सजनवा

छे कशिश कंई एवी आ काया कसुंबलमां सजनवा
के जान सामेथी लुंटावा चाली चंबलमां सजनवा

आज कंइ एवी कुशळताथी रमो बाजी सजनवा
जीतनारा संग हारेला ये हो राजी सजनवा

टेरवां मागे छे तमने आटलुं पूछवा सजनवा
आंसुओ साथे अवाजो कई रीते लूछवा सजनवा

- मुकुल चोक्सी

मुकुलभाईनी वात साव साची छे. ‘सजनवा’ के प्रेमनी अनुभूति विशे तो जेटलुं लखो एटलुं ओछुं ज पडे.  एना विशे आपणे जो कशुंक लखवा बेसीए त्यारे शेरोनी संख्या के लीटीओ नहीं गणाय, नोटबुकनां पाना पण नहीं गणाय अने आपणी लखवानी आधुनिक शैलीने ध्यानमां राखीने कहुं, तो ए लखवामां तो कम्पयुटरनी केटली याददास्त (RAM) वपराय छे ए पण नहीं गणाय !  :-) प्रेमनी अनुभूति ए एक एवो अहेसास छे के जेने मात्र अने मात्र अनुभवाय ज छे, जे शब्दोथी घणी उपरनी वात छे… काव्य लखवानी प्रक्रिया एटले के ए अनुभूतिनां एकाद अंशने फ्रेममां जडवानी कोशिश मात्र… जे कायम अधूरी ज लाग्या करे.  अने कोई कवितानी फ्रेममां जड्यां पछी पण हंमेशा एम ज थतुं रहे के हजी आनाथी पण वधु सुंदर फ्रेम बनी शकत. कदाच आ ‘अधूरप’मां ज एनी पूर्णता छे.

‘सजनवा’ ए मुकुलभाईनुं दीर्घ-काव्य छे, दीर्घ-गझल छे.  मुकुलभाईना मूळ सजनवामां 126 शेर छे अने बधा ज एक-एकथी चडियाता छे. जाणीता वार्ताकार डॉ. शरद ठाकर सजनवाना शेरो उपर एक आखो वार्तासंग्रह लखी रह्या छे/हता… (जेना पूरा थवा विशे कोईने जाण होय तो जणावशो !)   ‘सजनवा’ आम तो ए मत्ला-गझल छे, पण ‘सजनवा’ रदीफ कोई ध्रुवपंक्ति जेवो लागतो होई आ गझल जाणे गीतनी जेम पण म्होरी ऊठे छे.  गालगागानां चार आवर्तनोवाळी आ गझलनां दरेक शेरनां अलग-अलग काफियाने लीधे एने आझाद-काफिया गझल पण कही शकाय…

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