आजे मारा व्हाला विशालना जन्मदिवस पर सांभळीए आ मझानुं बाळगीत..!
Happy Birthday Vishal… Wish you a lot of fun today and always..!! … हेप्पी बर्थ डे बेटा!
(आ अमारो बचूडो…. )
स्वर : रूपांग खानसाहेब अने साथीओ
Music Arranger & Recording : मेहुल सुरती
Album : हसता रमता
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आजे grand finale मां कंईक वधु स्पेश्यल… आजनुं गझलपठन तमने मात्र सांभळवा ज नहीं परंतु जोवा पण मळशे… द्रश्य अने श्राव्य, बंने ! विवेक थोडा समय पहेलां ज अमेरिकानां प्रवासे आव्यो हतो जेनी आप सौने जाण हशे ज. अमेरिकामां एना घणा कार्यक्रमो पण योजाया हता. न्यु जर्सीनां एनां GLA द्वारा योजायेला ‘शब्दने सथवारे‘ कार्यक्रम दरम्यान लीधेली विडीयो क्लिपमांथी आजे एक गझल प्रस्तुत छे, खास आप सौ माटे.
आजे सांभळीए, हैया सोंसरवुं ऊतरी जतुं एषानुं एक खूब ज लोकप्रिय अछांदस… एनां ज गळचट्टा अवाजमां.
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दीकरीने अग्निदाह आप्यो,
ते पहेला ईश्वरने
बे हाथ जोडीने कह्युं हतुं,
सासरे वळावतो होउं एवी ज रीते
मारी दीकरीने विदाय करुं छुं,
ध्यान राखीशने एनुं?
अने पछी मारामां अग्निदाह देवानी ताकत आवी,
लाग्युं के ईश्वरे वेवाईपणुं स्वीकारी लीधुं…!
एने अग्निदाह आपीने पाछो फर्यो त्यारे पत्नीए
आंगणामां पाणी मूक्युं हतुं…
नाही नाखवानुं हवे दीकरीनां नामनुं…!
दीकरी विनानुं घर आजे दस दिवसनुं थयुं…
पत्नीनी वारेवारे भराई आवती आंखो
दीकरीना ड्रेसिंगटेबल अने छेल्लां दस दिवसथी
एकदम व्यवस्थित रहेलां एनां वोर्डरोब पर फरी वळे छे…
हुं पण त्यां जोउं छुं ने एक
निसासो नंखाय जाय छे…
ईश्वर, दीकरी सोंपता पहेलां तारा विशे
तपास कराववानी जरुर हती,
कन्यापक्षना रिवाजोने तारे मान आपवुं जोईए,
दस दिवस थई गयां…
अने अमारे त्यां पगफेरानो रिवाज छे…!!!
आजे सांभळीए र.पा.नां एक गीतनुं पठन, एमनां अवाजमां एक विशिष्ट लहेका साथे…
(हरी पर अमथुं अमथुं हेत… फोटोः वेब परथी)
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हरी पर अमथुं अमथुं हेत,
हुं अंगुठा जेवडी ने मारी व्हालप बब्बे वेंत.
अमथी अमथी पूजा करुं ने अमथा राखु व्रत,
अमथी अमथी मंगळ गाउं, लखु अमस्तो खत;
अंगे अंगे अमथी अमथी अगन लपेटो लेप,
हरी पर अमथुं अमथुं हेत.
‘अमथुं अमथुं बधु थतुं ते तने गमे के नईं?’
एम हरीए पूछ्युं त्यारे बहु विमासण थई;
कोई बीजु पूछत तो एने झटपट ना कही देत,
हरी पर अमथुं अमथुं हेत.
- रमेश पारेख
अमथुं अमथुं ज गमी जाय एवुं हरिगीत… अने हरि पर निष्कारण अमथुं अमथुं हेत होय ए ज प्रेम अने भक्ति साची ने !
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आजथी पत्रोने बदले लखजे नक्षत्रो सजनवा
खाली हो तो पाछी तारी ओढणी लई ले सजनवा
ने हाथ साथे हो तो किंमत सो गणी लई ले सजनवा
छे कशिश कंई एवी आ काया कसुंबलमां सजनवा
के जान सामेथी लुंटावा चाली चंबलमां सजनवा
आज कंइ एवी कुशळताथी रमो बाजी सजनवा
जीतनारा संग हारेला ये हो राजी सजनवा
टेरवां मागे छे तमने आटलुं पूछवा सजनवा
आंसुओ साथे अवाजो कई रीते लूछवा सजनवा
- मुकुल चोक्सी
मुकुलभाईनी वात साव साची छे. ‘सजनवा’ के प्रेमनी अनुभूति विशे तो जेटलुं लखो एटलुं ओछुं ज पडे. एना विशे आपणे जो कशुंक लखवा बेसीए त्यारे शेरोनी संख्या के लीटीओ नहीं गणाय, नोटबुकनां पाना पण नहीं गणाय अने आपणी लखवानी आधुनिक शैलीने ध्यानमां राखीने कहुं, तो ए लखवामां तो कम्पयुटरनी केटली याददास्त (RAM) वपराय छे ए पण नहीं गणाय ! प्रेमनी अनुभूति ए एक एवो अहेसास छे के जेने मात्र अने मात्र अनुभवाय ज छे, जे शब्दोथी घणी उपरनी वात छे… काव्य लखवानी प्रक्रिया एटले के ए अनुभूतिनां एकाद अंशने फ्रेममां जडवानी कोशिश मात्र… जे कायम अधूरी ज लाग्या करे. अने कोई कवितानी फ्रेममां जड्यां पछी पण हंमेशा एम ज थतुं रहे के हजी आनाथी पण वधु सुंदर फ्रेम बनी शकत. कदाच आ ‘अधूरप’मां ज एनी पूर्णता छे.
‘सजनवा’ ए मुकुलभाईनुं दीर्घ-काव्य छे, दीर्घ-गझल छे. मुकुलभाईना मूळ सजनवामां 126 शेर छे अने बधा ज एक-एकथी चडियाता छे. जाणीता वार्ताकार डॉ. शरद ठाकर सजनवाना शेरो उपर एक आखो वार्तासंग्रह लखी रह्या छे/हता… (जेना पूरा थवा विशे कोईने जाण होय तो जणावशो !) ‘सजनवा’ आम तो ए मत्ला-गझल छे, पण ‘सजनवा’ रदीफ कोई ध्रुवपंक्ति जेवो लागतो होई आ गझल जाणे गीतनी जेम पण म्होरी ऊठे छे. गालगागानां चार आवर्तनोवाळी आ गझलनां दरेक शेरनां अलग-अलग काफियाने लीधे एने आझाद-काफिया गझल पण कही शकाय…
आ ब्लोग पर अन्य कविओनी जे रचनाओ पोस्ट करी छे, एने लीधे जो कोइना कोपीराइटनो भंग थयेलो कोइने लागे अने मने जाण करवामां आवशे, तो तेने सत्वरे अहींथी दूर करीश. पण मने आशा अने श्रद्धा छे के सौ सर्जको अने प्रकाशको तेम ज तेमना वारसदारो गुजराती भाषाना पनोता संतानोने माटे विश्व-गुर्जरी समाजमां सभानता केळववाना आ निस्वार्थ प्रयत्नोने हृदयपूर्वक टेको आपशे अने बीरदावशे.
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