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गागरमां सागर

गुजराती लिटररी ऍकेडेमी ओफ नोर्थ अमेरिका

अने

टीवी एशिया

सहर्ष प्रस्तुत करे छे…

‘काव्यसंगीतयात्रा’

गुजराती भाषाना अर्वाचीनोमां आद्य एवा नर्मदथी मांडीने राजेश व्यास ‘मिस्कीन’
सुधीना अनुआधुनिक कविओनां काव्योनी संगीतमय रजूआतनो एक कार्यक्रम.

मातबर गुजराती कविओ ‘मरीझ’ अने मनोज खंडेरियानी कृतिओनी सूरोमां रजूआत करती
बे CDनां विमोचन पण आ कार्यक्रम दरम्यान थशे. (आ साथेनां CD कवर जोशो.)

गायको : अमर भट्ट, दर्शना झाला अने फोरम शाह

संगत : हरीश टेइलर (मॅंडोलिन), दीपक गुंदाणी (तबला)

दिवस : रविवार, ५ मे, २०१३

समय : बपोरे बराबर २:०० वागे

प्रवेश : $१० (ऍकेडेमीना सभ्य), $२० (बीन-सभ्य)

स्थळ : टीवी एशिया ऑडिटोरियम, 76 National Road, Edison, NJ

माहिती :

राम गढवी 973-628-8269

Directions to TV Asia, 76 National Road, Edison, NJ :

NJ Tnpk to exit 10 * Take I-287 North * Exit 2-B to Rt. 27 South * At 3rd traffic light, right on Talmadge Rd

Go about ½ mile * Turn right on National Road * About ¼ mile to TV Asia building on your left.

*

Mareez CD Cover MKhanderiya CD Cover

आजे गुजराती फिल्म सप्तपदीनुं आ मझानुं गीत - अने साथे थोडी माहिती!

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TV Asia releases Saptapadii in New Jersey at BIG Cinema in Edison from Friday
May 3rd at 7:15pm Daily

TV Asia Releasing in Edison NJ

Gujarati Literary Academy, Share and Care Foundation and Bharatiya Vidya Bhavan are proud to have presented modern Gujarati Film Saptapadii in NJ as exclusive premiers ! With overwhelming response from their membership to the shows of Modern Gujarati film Saptapadii, it was not possible to accommodate all members due to limited theatre capacity. For members who could not see the film there is an opportunity to go and see the film in Edison NJ at 7:15pm all week starting next Friday May 3rd.

The film has been screened in Phoenix AZ, Boston MA, and Edison NJ to rave reviews from viewers; More shows are planned in USA and Canada, Dubai, Muscat, Portugal, Australia, New Zealand, East Africa; etc. Audiences will surely love this very refreshing modern Gujarati film; which is running for 11 weeks in Mumbai and has been to multiple international film festivals;

Hit Gujarati film Saptapadii written by Boston based poet, playwright Chandrakant Shah along with Director Niranjan Thade and popular Gujarati writer Kajal Oza Vaidya with Music by Rajat Dholakia and Piyush Kanojia and produced by Amitabh Bachchan’s AB Corp. Worldwide distributed by Dr. Devdatt Kapadia of Different Strokes Communications of Mumbai. Top Bollywood Technicians have worked on this film for its post production. TV Asia and Parikh Media Worldwide are USA Media partners !

मित्रो,

आपे शब्दो छे श्वास मारा - लयस्तरो - टहुको अने
बीजा ब्लोग्स - फेसबुक जेवी जग्याए ओनलाइन, कवि संमेलनमां, कोइ कवितानी चोपडीमां, अखबारमां.. एम घणीवार विवेक टेलरनी कलमने माणी ज हशे..!

vivek

अने कदाच आपे एना काव्यसंग्रह - शब्दो छे श्वास मारा, गरमाळो पण वांच्या हशे, अने हा अडधी रमतथी… विवेकना शब्दोनुं ए स्वरमानुं तो क्यांथी भूलाय?

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तो आजे… व्हाला मित्र विवेकना जन्मदिवसे - एने जन्मदिननी खूब खूब शुभेच्छाओ साथे - एना शब्दो अने स्वरनामानुं एक नवुं सरनामुं..!

अमेरिकामां रहेता विवेकना चाहको माटे खास:
विवेकनो गझलसंग्रह ‘शब्दो छे श्वास मारा’ , काव्यसंग्रह ‘गरमाळो’ अने एना गीत-गझलोनुं स्वरांकन - अडधी रमती - हवे कोम्प्युटरनी थोडी क्लिक पर तमारा घर आंगणे..!!

नीचे आपेल लिंक पर क्लिक करो - जे तमने लइ जशे - Ebay - जेना परथी तमे विवेकना शब्दो-स्वर तमारा घर आंगणे मंगावी शकशो.

अडधी रमतथी - विवेक टेलरना गीत-गझलनुं स्वरनामुं

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गरमाळो - काव्यसंग्रह

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शब्दो छे श्वास मारा - गझलसंग्रह

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थोडा दिवसो पहेला ज वसंतपंचमीना दिवसे ऊर्मिनी आ गझल आप सौए - ऊर्मिनो सागर - पर तो माणी ज हशे. आजे अहीं आ गागरमां पण ए अडबंग ऊर्मिओ छलकावी ज दइए..!! अने हा, साथे माणीए जुगलकाकाए करावेलो एवो ज मझानो आस्वाद..!!

bee-flower

(तारी मारी वच्चे आ उन्माद जेवुं… फोटो: ऊर्मि)

इच्छानुं तो एवुं छे भै, घास जेवुं…
ऊगी आवे ज्यां मळे भीनाश जेवुं.

तारी मारी वच्चे आ उन्माद जेवुं…
कैंक तो छे ढाइ अक्षर पाश जेवुं !

मारी अंदर रहुं छुं हुं हज्जार रूपे…
तोय मने हुं क्यां मळुं जराक जेवुं !

सूरज समजणनो पछी देखाय शाने ?
होय मन ज्यां गोरंभायेल आभ जेवुं !

तुं जो नहीं आवे सखा, तो चालशे,
मोकल मबलख मघमघ थोडी याद जेवुं.

आटला वर्षे समजायुं ‘ऊर्मि’ने आ,
साव अडबंग होय छे आ व्हाल जेवुं !

- ऊर्मि (५ ऑगष्ट २०१२)

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अने हवे माणीए जुगलकाका ( श्री जुगलकिशोर व्यास) द्वारा आ गझलनो एवो ज मझानो आस्वाद!

‘ऊर्मि’ नामथी ओळखाती ने ‘ऊर्मिनो सागर’ नामक साईट छलकावती आ कवयित्री लांबा समयथी ब्लॉगजगतनी सर्जनात्मकशक्तिरूपा छे अने विदेशोमां ऊजवाता रहेता अनेक प्रसंगोमां सहयोगी भूमिका भजवती एवी व्यक्तिविशेषरूपा छे. पोताना ब्लॉग पर एमणे अनेक प्रयोगो कर्या छे. सहियारा सर्जननो एमनो प्रयोग ब्लॉगजगतमां एक मजानो प्रयोग बनी रह्यो छे….एमनी रचनाओमां एमना तखल्लुस ऊर्मिनुं विशेष प्राधान्य होय छे.

अहीं प्रस्तुत एमनी रचनामां ऊर्मितत्त्वनां केटलांक रूपो एटलां सूक्ष्म छे के कवयित्री पण एने स्पष्ट नाम नथी आपी शकतां – ने एटले समग्र गझलमां कहेतां रह्यां छे के ए कशुंक “एना जेवुं” छे. मनना विविध भावो आ आखी रचनाने सळंग एक विचार पर पकडी राखे छे.

शरूआत तेओ इच्छा नामक एक एवा तत्वथी करे छे जेने अध्यात्ममां बहु वगोववामां आव्युं छे. पण नर्या जीवनमां तो ते तत्त्व एवुं सहज छे के सहेज अमथी भीनाश हैये देखाई नथी के ते – घासनी जेम – ऊगी नीकळी नथी !

मजानी वात तो ए छे के, प्रेमतत्त्वने इच्छानी पछी तरत ज मूकीने एमणे ढाई अक्षरी तत्त्वनो पाश उन्माद कहीने सरस रीते समजावी दीधो छे. एय ते वळी एटले सुधी के उन्मादमां फसायेलुं व्यक्तित्व पोताने माटे पण समय काढी शकतुं नथी ! पोतानी भीतरमां हज्जारो रूप धरीने रहेतुं व्यक्तित्व पण भावजगतनी विविध लीलाओ वच्चे एटलुं बधुं व्यस्त–मस्त होय छे के खुदने पण जो मळे तोय फक्त ‘जराक जेवुं’ ज मळी शके छे !

हवे जो परिस्थिति आवी होय तो कारण पण जाणवुं रह्युं. कवयित्री ते शोधी काढे छे : एमने ‘समजाय’ छे के, मन जो (आवा भातभातना भावो थकी) आकाशी गोरंभथी ग्रस्त होय तो सूर्य जेवो सूर्य पण देखी शकातो नथी. एटले कहेवानुं तो ए पण थयुं ने के, प्रेम आंधळो नथी….तकलीफ जे कांई थाय छे प्रेममां, ते तो थाय छे आ अनेक भावोना गोरंभने लीधे !!

जोके प्रेमतत्त्वनुं एक सुख होय छे. एमां आडशे छुपायेली वासना जो भळेली ना होय तो ए बहु संतुष्टतत्त्व छे. सखो सदेहे ज सामे आवीने ऊभो रहे एवी स्थूळतानुं ए लालची नथी. प्रेमतत्त्व तो लगरीक याद जेवी झरमर थकीय तुष्टतुष्ट बनी रहे छे.

भावोमां रममाण व्यक्तित्व जीवनना भावुक अने व्यावहारिक एवा बन्ने प्रकारना अनुभवोमांथी जोके क्यारेक समजण पण मेळवे छे, आ बधा भावो अंगे भले स्पष्टरूपे नहीं तोय कशोक सार ते काढे छे. एने वारंवारना बदलाता रहेता भावानुभवोने अंते ‘समजाय’ छे के आ बधा अवारनवार ने आडेधड आवी चडता भावो के जेने पोते चाहती रही छे, व्हाल करती रही छे ते साव अडबंग ज होय छे बलके ए व्हाल ज खुद अडबंग छे !!

अहीं मीरांने लगरीक याद करवी पडे ! एणे गायुं छे ने के, “मैं जो ऐसा जानती….(तो) नगर ढिंढोरा पीटती, (के) प्रित न कीजो कोई !” भले, मीरांनी समजण ने ऊर्मिनी समजणमां “समजण फेर” जुदो ने झाझो छे पण ते छतां अहीं बेउने भेगी करी देवानुं साव अप्रस्तुत तो न ज गणाय !

एक नानकडी शब्दयोजना तरफ ध्यान दोरवा जेवुं लागे छे. सखाने थोडी…क याद जेवुं मोकलवानुं कहेती कवयित्री पाछी बे मोटां विशेषणोय सखाने सोंपीने मूंझवी मारे छे ! एक छे घ्राण विषयक विशेषण ‘मघमघ’ अने बीजुं जथ्थावाचक विशेषण ‘मबलक’ !! सखो बीचारो आवडुं मोटुं पार्सल ‘लगरीक’ यादना नाम–सरनामे–बहाने शी रीते मोकली शकशे, ऊर्मिबहेनां ?!

न्यु जर्सी, प्लेंसबोरोमां योजानार GLA of NA नां आठमा साहित्य संमेलननो विगतवार कार्यक्रम जोवा माटे नीचेनी लिंक पर क्लिक करो :

आजे ‘हस्ताक्षर’ आल्बमनुं मने खूब ज गमतुं एक व्हालनुं गीत…

peogion-cloud

कोई पारेवुं वादळभरी रोतुं हशे ? Photo: from web

स्वर : श्यामल मुनसी
संगीत : श्यामल-सौमिल मुनसी

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आटलुं बधुं व्हाल ते कदी होतुं हशे ?
कोई पारेवुं वादळभरी रोतुं हशे ?

जीवनमां बस एक ज घटना, एक ज घटना
भीतर एक ज नामनी रटना, नामनी रटना.
पोतानुं ते नाम कदी कोई खोतुं हशे ?
कोई पारेवुं वादळभरी रोतुं हशे ?     आटलुं बधुं  o

जीरव्यो केम रे जाय वलोपात आटली हदे ?
आटलो बधो प्रेम शुं कदी कोईने सदे ?
नजर लागे एम शुं कोईने जोतुं हशे ?
कोई पारेवुं वादळभरी रोतुं हशे ?      आटलुं बधुं  o

- सुरेश दलाल

गुजराती साहित्यनां एक सबळ स्तंभ समान श्री सुरेश दलाल जेवा मिजाजी कविनी चीरविदाय समग्र गुजराती साहित्य जगतमां खडभडाट मचावी दे एमां कोई नवाईनी वात नथी.  ऊर्मिसागर.कॉम तरफथी एमने सादर श्रद्धांजलि पाठववा थोडा दिवस माटे ‘गागरमां सागर’ पर एमनां ज शब्दोथी एमने स्नेहांजलि आपीए…

स्वर : ऐश्वर्या हीरानी अने सुपल तलाटी
Composer : मोनल शाह
Music Arranger & Recording : मेहुल सुरती
आल्बम : ‘हसता रमता’ by Hobby Center, Surat

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किट्टा किट्टा… किट्टा…
किट्टा किट्टा… किट्टा…

इला, तारी किट्टा…

कनु, तारी किट्टा…

मारी पासे मीठी मीठी शेरडी ने सिंगो
ले हवे तुं लेतो जा हुं आपुं तने डींगो

मारी पासे खाटी मीठी आंबली ने बोर
एके नहीं आपु तने छो ने करे शोर

जाणे हुं तो आंबली ने बोर नो तु ठळीयो
भोग लाग्या भाग्यना के भाइ आवो मळीयो

बोली बोली वळी जाय जीभना छो कुच्चा
हवे कदी करुं नही तारी साथे बुच्चा

जा जा हवे लुच्चा….

इट्टा अने किट्टानी वात अल्या छोड,
भाइ बहेन केरी क्यां जोइ एवी जोड!

- सुरेश दलाल

नीचेनी जाहेरात वांचवा माटे एना पर क्लिक करो:

ऊर्मिसागर.कॉमनी छठ्ठी वर्षगांठनी उजवणीनुं आ छेल्लुं काव्यपठन मारा गझल-गुरु तरफथी… गझल पण तरोताजा अने एनुं पठन पण.

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(सफर अने पडाव…       पहलगाम, काश्मीर…   फोटो: विवेक टेलर)

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नितांत लोभनो कोई बचाव होय नहीं,
बधुं ज त्यागवुं एवुंय साव होय नहीं.

सफरमां थोभवुं मारो स्वभाव होय नहीं,
बनाव होय नहीं तो पडाव होय नहीं.

हशे अवश्य कोई चोर मनमां पहेलेथी,
नकर आ हावभाव, आ तणाव होय नहीं.

कहुं हुं केम के तुं क्यांय रही नथी मुजमां ?
वमळ ऊठे छे, भले कंकराव होय नहीं.

भीतरमां कंईक तो छे एनी खातरी जो न हो,
तो श्वासनी आ सतत आवजाव होय नहीं.

जमा थया हशे तारा स्मरण त्यां पीगळीने,
नकर आ ज्वाळाना मुखमां तळाव होय नहीं.

ए पाछी नहीं ज फरे, जीव ! तुं ऊठाव पडाव,
हवे आ स्थळनो घडीभर लगाव होय नहीं.

अडी-अडीने सपाटीने शुं फरे छे बधुं ?
गझलमां बाकी नवानो अभाव होय नहीं.

- विवेक मनहर टेलर
(२६/२८-०५-२०१२)

आम तो मने बधा ज शेरो गमी गया… परंतु वमळ-कंकराव अने श्वासनी आवजाववाळा शेरो जरा वधारे गमी गया.

मत्लानो शेर वांचीने मने मारो ज एक शेर याद आवी गयो… शक्य क्यां छे अहीं परित्यागी थवुं ! त्यागनुं पण एक वळगण जोईए.

*

ऊर्मिसागर.कॉमनी छठ्ठी वर्षगांठनी उजवणीमां भाग लेवा बदल आप सौ वाचक-भावक-चाहक मित्रोनो दिलथी खूब खूब आभार… बधा कविमित्रोनो एमनी रचना अने एना काव्यपठन बदल खासम-खास आभार, एकदम दिलसे.  फरी मळता रहीशुं, अहीं… नियमित अनियमितपणे… के पछी, अनियमित नियमितताथी !  :-)

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(सपाटी अने स्पर्श…       नगीन लेक, श्रीनगर…     फोटो: विवेक टेलर)

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