Maa Sarveshwari's bhajans

परमात्मानो पवित्रतम प्रखर प्रेम कांइ सौ कोइना प्राणमां प्राकट्य पामे छे? भक्त कवि दयारामे ठीक ज कह्युं छे के 'जे कोइ प्रेमअंश अवतरे, प्रेमरस तेना उरमां ठरे'. जेमनां अंतःकरण निर्मळ थया होय, दुन्यवी आकर्षणो ओसर्या होय, जेमना विवेक, वैराग्य तथा शम-दम सुद्रढता पर पहोंच्या होय अने जेमने जीवनमां परमात्माने पामवानी ज कामना होय तेवा विरल आत्माओ परमात्मानी प्रेमभक्तिथी संपन्न बनीने परमात्मा माटे ज श्वास लेता जणाय छे.
'अर्घ्य' अने 'अंजलि' जेवा भजनसंग्रहनां रचयिता मा सर्वेश्वरी एवां ज विरल - अतिविरल, परमात्मानां प्रेमरंगे रंगायेल अने परमात्मामां ज जीवनारां असाधारण आत्मा छे. गीतोना माध्यम द्वारा सर्वेश्वरीना अंतरनी भगवदभावना, एमनी आत्मिक आराधना तथा अनेकविध आध्यात्मिक अनुभूतिओ वहेती थइ छे. सर्वेश्वरीना गीतोमां सहजता अने नैसर्गिकता छे; शब्दोनो व्यर्थ आडंबर, भाषानी भभक के किलष्टतानुं दर्शन एमां नथी थतुं.
पूर्वसंस्कारोना सुपरिणाम स्वरूपे सदगुरूनो मेळाप, एमनुं मंगल मार्गदर्शन, एमनामां अविचळ श्रद्धा तथा आगळ जतां गुरू अने गोविंदनी अनुभूतिजन्य एकरूपता एमना पदोमां प्रतिच्छबित थइ छे. पोताना सदगुरूने माता स्वरूपे जोवानी एमनी वृति गुरू साथेनी एमनी प्रगाढ भावमयता, निर्मळता अने सहज स्नेहभावने छतो करे छे. गुरूदेवनी मांदगी प्रसंगे ज्यारे सर्वत्यागनी क्षण आवी त्यारे तेने नीडरता, हिंमत तथा लोकोपवादने गौण गणी सहर्ष अने समजपूर्वक वधावी लीधी. जीवननी ए निर्णायक क्षण समयनी मनोस्थिति उपरांत सर्वेश्वरीनां भजनो द्वारा एमनो कृष्णप्रेम, मौनमंदिरनी अवनविन अनुभूतिओ, कृपा संनिधिनी आरझू तथा इश्वर दर्शननी तरस वाचा पामी छे.
कवननी साथे साथे मधुर कंठनी बहुमुल्य भेट पामनार सर्वेश्वरीनां पदोने एमनां स्वमुखे सांभळवा ए एक ल्हावो हतो. १९९५थी मौनव्रत धारण करतां पहेलां पोताना रचेल पदोने स्वरबद्ध करी मा सर्वेश्वरीए जनसमाजने अनुपम भेट धरी छे. गुजरातना मूर्धन्य साक्षर इश्वर पेटलीकरना मुखे 'अर्वाचीन युगनां मीरां' नुं बिरुद पामेल सर्वेश्वरीना परमात्मप्रेमी काळजानी कथा कहेतां आ भक्तिरस सभर पदोने आपणे माणवा ज रह्यां.
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पू. माना भजनो सांभळो
