विद्याविहारने.. September 12, 2008
Posted by Mehul Shah in सी.एन.समाचार.Tags: ambavadi, bhailal shah, C N vidhyalaya, c.n. vidyalaya, cn prarthnamandir, sheth cn vidhyalaya, sheth cn vidyalay, snehrashmi, vidhyavihar, vidyalay, vidyavihar
6 comments
जुओ, मुदभर वसंत आवे ! October 31, 2009
Posted by Mehul Shah in गीत, भाईलाल शाह, स्नेहरश्मि.Tags: अबील, उपवन, गुलाल, दक्षिण, निकुंज, पनघट, पराग, फाग, माणेक, मृदु, मोती, रंग, रमझट, वसंत, वाट, वीणा, सुहाग, स्नेहरश्मि
2 comments
कविः स्नेहरश्मि
गायकः भाईलाल शाह
बाजे वन उपवनमां जलथलमां
वीणा कोनी जगमां?
दक्षिण दिशना आतुर गाने
कह्युं शुं छानुं कोकिल काने ! – (२)
मंजरीओ मृदु आंखो खोली (२)
जुए कोनी वाट मगनमां!
वीणा बाजे जगमां ! -बाजे०
कुंज निकुंजने काने कोणे
मूक्यां माणेक मोती कोडे? (२)
अबील गुलालने हासे कोणे (२)
मलक्यां मुखडां कुसुमतणां?
वीणा बाजे जगमां ! – बाजे०
रंग राग परागनी रमझट
जामी आजे जगने पनघट,
जुओ मुदभर वसंत आवे – (२)
सोहे फाग सुहाग गगनमां !
वीणा बाजे जगमां ! -बाजे०
मानवीनां हैयाने नंदवामां वार शी? October 25, 2009
Posted by Mehul Shah in उमाशंकर जोशी, गीत, भाईलाल शाह, विद्याविहार गीतो.Tags: उमाशंकर जोशी, बोलडे, भाईलाल शाह, मानवी, स्मित, हैयाने
2 comments
कविः उमाशंकर जोशी
गायकः भाईलाल शाह
मानवीनां हैयाने नंदवामां वार शी ? (२)
मानवीना हैयाने…
अध बोल्या बोलडे,
थोडे अबोलडे, (२)
पोचा शा हैयाने पींजवामां वार शी? (२) – मानवी०
मानवीना हैयाने….
स्मितनी ज्यां वीजळी,
जरी शी फरी वळी, (२)
एना ए हैयाने रंजवामां वार शी?
एवा ते हैयाने नंदवामां वार शी?- मानवी०
मानवीना हैयाने …
एवुं रे तपी धरती October 25, 2009
Posted by Mehul Shah in गीत, प्रहलाद पारेख, भाईलाल शाह, विद्याविहार गीतो.Tags: तप, धरती, पारवती, प्रहलाद पारेख, भाईलाल शाह, मेहुलो, cn prarthnamandir, sheth cn vidhyalaya
2 comments
कविः प्रहलाद पारेख
गायकः भाईलाल शाह
एवुं रे तपी धरती, एवुं रे तपी,
जेवां तप रे तप्यां’तां एक दिन पारवती सती
अंग रे सुकाय, एनां रंग रे सुकाय,
कायानां अमरत एनां ऊडी चाल्यां जाय,
तोये न आव्यो हजुये मेहुलो जति…. एवुं रे…
वन रे विमासे एनां जन रे विमासे,
पंखीडां जोतां एनां पशुओ आकाशे;
जटाळो ए जोगी क्यां ये कळातो नथी… एवुं रे…
कहोने तमे सौ तारा ! दूरे छो देखनारा,
कहोने डुंगरनां शिखरो ! आकाशे पहोंचनारां;
आंखोनी वीज एनी झबूकी कहीं ?…. एवुं रे…
कहोने सागरनां पाणी, तमने छे संभळाणी,
घेरी गंभीर एनी आवती क्यां ये वाणी ?
एनी रे कमान दीठी तणाई कहीं ?… एवुं रे….
आवोने मेहुलिया ! आवो, धरतीनां तप छोडावो,
रूपे ने रंगे नवां तपसीने ए सुहावो;
अमरतथी हैयुं एनुं दियोने भरी !…. एवुं रे….
सी.एन. श्लोक – 3 October 25, 2009
Posted by Mehul Shah in भाईलाल शाह, विद्याविहार गीतो, श्लोक.Tags: ऋषभ, पार्श्वनाथ, भाईलाल शाह, महावीर, मुनिव्रत, श्लोक, सी.एन., सी.एन. श्लोक, सुपार्श्व
2 comments
गायकः भाईलाल शाह
ऋषभ, अजीत, संभव, अभिनंदन, सुमति, पद्मप्रभु, सुपार्श्व, चंद्रप्रभ, पुष्पदंट, शीतल, श्रेयांश, वासुपूज्य, विमल, अनंत, धर्म, शांति, कुंथु, अरह, मल्लि, मुनिव्रत, नमि, नेमि, पार्श्वनाथ अने महावीर.
कोण आजे रहे बंध बारणे? July 18, 2009
Posted by Mehul Shah in गीत, प्रहलाद पारेख, बाळ गीतो, भाईलाल शाह, विद्याविहार गीतो.Tags: उत्सव, खुशी, गुजरात, गुजराती, जगत, धरती, धरा, नभ, प्रहलाद पारेख, भाईलाल शाह, वर्षा गीत, वादळ, सरिता, सागर, सूर
5 comments
कविः प्रहलाद पारेख
गायकः भाईलाल शाह
वर्षा गीत
कोण आजे रहे बंध बारणे?
आव, आव, जो जगत-प्रांगणेः (२)
सागर हिल्लोले वनवन डोले,(२)
वीज चडी छे विराट झूले;
दुरे, सीमे, नव नव मोले(२)
धरतीनुं दिल खोले. -कोण.
वादळ-नादे झरणां जागे, (२)
मत्त बनी घर सरिता त्यागे;
जलधाराना सहु झंकारे (२)
संजीवन-सूर वागे. – कोण.
आभ खुशी जो विध विध रंगे, (२)
धरा खुशी नव-धान-सुगंधे;
धरती-नभना आ उत्सवमां (२)
आव, आव, सहु संगे. – कोण.
कोनी जुए छे तुं वाट? July 18, 2009
Posted by Mehul Shah in गीत, प्रहलाद पारेख, भाईलाल शाह, विद्याविहार गीतो, शिशुविहार गीतो.Tags: अभागी, गांसडी, गीत, गुजरात, गुजराती, दुःख, प्रहलाद पारेख, भव्य, भाईलाल शाह, ललाट, लाकडी, वाट, विराट, bhailal shah, gujarati, prahlad parekh
add a comment

कोनी जुए छे तुं वाट![]()
कविः प्रहलाद पारेख
गायकः भाईलाल शाह
कोनी जुए छे तुं वाट, अभागी !
कोनी जुए छे तुं वाट?
कोण रे आवी नाव लावी तुज,
नांगरशे उर-घाट ? – कोनी.
उठ, उभो था, झाली ले लाकडी,
लई ले तारी कांधे तुं गांसडी;
आववानुं नथी कोई
तेथी ना रे’वुं रोई;
जावानुं छे तारे,
-थावानुं छे तारे,
नाना मटीने विराट. – कोनी.
आफत आवशे आभथी उतरी,
लेशे धरा निज दुःखमां जोतरी,
तोय छे तारे माथे,
थई एक जवुं सहु साथे,
लेख लख्या छे ए,
मानवी तारे
एक ज, भव्य, ललाट. – कोनी.
तमे रे सुंदरवननां सूडला रे July 18, 2009
Posted by Mehul Shah in अचल महेता, गरबा, गीत.Tags: अचल महेता, ऋषभ ग्रुप, कंठ, किलकार, कोडियां, गीत, गुजरात, गुजराती, छीपलां, ज्योत, तूंबडा, दीवो, पंखीडा, प्रीत, मन, वाट, वाडी, वेली, सुंदरवन, सूडला, हेल, gujarat, gujarati
2 comments

अचल महेता, ऋषभ ग्रुप
तमे रे सुंदरवननां सूडला रे, अमे तो तवकंठनो किलकार,
अमे रे वेली ने तमे बांधवा मननां मळ्या तारेतार हो,
एक रे वाडीना दोनो तूंबडा (२)
तमे रे महेरामण, अमे छीपलां रे , तमे रे मोती ने अमे हेल रे,(२)
तमे रे माटी ने अमे कोडियां, तमे दीवो ने अमे वाट रे,
ज्योत रे विनानां दोनो झूरतां(२)
तमे रे माटी ने अमे कोडियां रे, तमे रे दीवो ने अमे वाट रे,
सामा रे कांठाना अमे पंखीडा रे, ऊडीने आव्यारे आ पार हो,
प्रीत रे पडाळे अमे हींचता,
तमे रे सुंदरवननां सूडला रे, अमे तो तव कंठनो किलकार,
अमे रे वेली ने तमे बांधवा मननां मळ्या तारेतार हो,
एक रे वाडीना दोनो तूंबडा (२)
आज धानेर क्षेते July 18, 2009
Posted by Mehul Shah in गीत, बाळ गीतो, रविन्द्रनाथ टागोर, विद्याविहार गीतो.Tags: धानेर, रविन्द्रनाथ टागोर, रौद्रछाय़ाय़, लुकोचुरिर, संताकूकडी, ravindra
5 comments

आज धानेर खेते
(Chorus-Children)
“Aji dhaner khete roudro chayay
lukochuri khela re bhai lukochuri khela “
आ गीत प्रार्थना मंदिरमां गवातुं हतुं त्यारे एके शब्द खबर नहोती पडती, ए पछी भोळाभाई पटेलनी ‘शालभंजिका’मां आ गीतनी बे पंक्तिओ गुजरातीमां अनुवाद करेली वांची,जेमां भोळाभाई शांतिनिकेतनना वर्णन वखते टागोरना आ गीतने याद करीने लखे छे के,”आज डांगरना खेतरे तडको-छांयडो संताकूकडी रमे छे …”
आ गीतनो आखो अनुवाद कोईनी पासे होय तो लखवा विनंती.
आज धानेर क्षेते रौद्रछाय़ाय़
लुकोचुरिर खेला..
नील आकाशे के भासाले
सादा मेघेर भेला..
आज भ्रमर भोले मधु खेते,
उड़े बेड़ाय़ आलोय़ मेते,
आज किसेर तरे नदीर चरे
चखाचखिर मेला..
ओरे याबो ना आज घरे रे भाइ,
याबो ना आज घरे!
ओरे आकाश भेङे बाहिरके आज
नेब रे लुठ करे..
येन जोय़ार जले फेनार राशि
बातासे आज फुटेछे हासि,
आज बिना काजे बाजिय़े बाँशि
काटबे सारा बेला..
आवे छे हवा,मुक्त हवा, मस्त हवा.. April 22, 2009
Posted by Mehul Shah in गीत, प्रहलाद पारेख, भाईलाल शाह, विद्याविहार गीतो.Tags: आभ, गीत, गुजरात, गुजराती, जाळ, धण, नीर, प्रहलाद, प्रहलाद पारेख, फाळ, बंध, मनवा, मस्त, मुक्त, वादळ, सूर, हवा, prahlad parekh
1 comment so far
कविः प्रहलाद पारेख
गायकः भाईलाल शाह
आवे छे हवा,
मुक्त हवा, मस्त हवा,
मनने मारा क्यां रे लई जवा? - आवे छे.
वादळ केरुं धण हलावी,
हेले सायर नीर चडावी,
वांसवने कैं सूर बजावी,
फूल हींचावी आवती,
आवती प्रेरती मारा पायने नाचवा. – आवे छे.
चाल, कहे ए, मनवा, चाल,
छोडी दई सहु बंध-जाळ
एक तारेथी तारले बीजे
आभमां देवा फाळ !
शिखरे शिखरे सागरनी रे आ ने घूमवा ! – आवे छे.
दलडां संभारो तमे, ह्र्दये विचारो आपणां April 22, 2009
Posted by Mehul Shah in गीत, भाईलाल शाह, विद्याविहार गीतो.Tags: दलडां, पारधी, पींगळा, पोपट, पोपट राजा रामनां, ब्राह्मणी, भव, भिक्षा, भेख, मरण, मृग, मृगली, राजा, राणी, शिवजी, bharthari, bhiksha de de maiya, king bharthari, lok katha, maiya, pingla
2 comments

दलडां संभारो तमे, ह्र्दये विचारो आपणां![]()
( Raja Bharthari and Rani Pingala – Lokkatha)
गायकः भाईलाल शाह
दलडां संभारो तमे, ह्र्दये विचारो आपणां,
पूरव जनमनां समाचारने(२)
पे’ला पे’ला भवमां राणी,
तमे हतां मेना ने अमे रे पोपट राजा रामनां(२)
पारधीए आवी अमने फांसलो नाख्यो ने
फांसले वींधाणा मारा प्राण राणी पींगळा,
ई रे कारणीये हुं मरण ज पाम्यो ने,
तुं केम ना’वी मारी राणी पींगळा…… दलडां(२)
बीजा बीजा भवमां राणी,
तमे हतां मृगली ने अमे हतां मृग सरदार रे (२)
कदली रे वनमां चारो चरवांने ग्यां त्यारे
पारधीए मारेलां बाण राणी पींगळा
ई रे कारणिये हुं मरण ज पाम्यो ने
तुं केम ना’वी मारी साथ राणी पींगळा हो.. दलडां(२)
त्रीजा त्रीजा जुगमां राणी
तमे हतां ब्राह्मणीने अमे हतां पंडितरा’य रे
शिवजीने कारणे, फूल वीणवां ग्यां त्यारे
डसेलो कळूडो नाग रे..
ई रे कारणिये हुं मरण ज पाम्यो ने..(२)
चोथा चोथा भवमां राणी,
तमे तो पींगळा ने अमे रे भरथरी रा’य रे (२)
चार चार जुगना राणी घरोवास भोगव्यां तो ये
तुं ना चाली मारी साथ रे .. राणी पींगळा(२)
कायाने कारणे में भेख ज लीधो ने (२)
भिक्षा दियोने मोरी माय राणी पींगळा…. हो दलडां संभारो (२)
Same song from Gujarati Movie![]()
Bhiksha dene Maiya Pingala![]()
from ” Bharthari” – Hindi Movie
bhiksha de-de maiya pingala
jogi khada hai dwaar maiya pingala
jog utaaro raaja bharatari
raani kare hai pukaar raaja bharatari
bhiksha de-de maiya pingala
jogi khada hai dwaar maiya pingala
kaise dekhuun jog tumhaara - 2
gaayuun prahar kataar raaja bharatari
karm-likhi na mite kise se - 2
karnahaar karataar maiya pingala
kesar-chandan chhod ke raaja - 2
linhi bhabhuuti dhaar raaja bharatari
kesar kaaya raakh banegi - 2
isamein kaun singaar maiya pingala
alakh jagaavo mahal mein raaja - 2
duungi aanchal daar raaja bharatari
jogi to jangal ke baasi - 2
kaisa ghar-sanasaar maiya pingala
daya na aayi o niramohi - 2
o niramohi chhod chale majhadhaar raaja bharatari
alakh niranjan alakh niranjan alakh niranjan
alakh niranjan alakh niranjan alakh niranjan
alakh niranjan japo ri maiya - 2
ho bhav-saagar paar maiya pingala
bhiksha de-de maiya pingala
jogi khada hai dwaar maiya pingala
jog utaaro raaja bharatari
raani kare hai pukaar raaja bharatari
bhiksha de-de maiya pingala
jogi khada hai dwaar maiya pingala





