Online TransLiteration by girgit.chitthajagat.in, of http://apnamat.blogspot.com/search/label/चीन Disclaimer
You may also see this page in Bangla, Devanagari, Gujarati, Gurmukhi, Kannada, Malayalam, Oriya, Roman(Eng), Tamil, Telugu
Showing posts with label चीन. Show all posts
Showing posts with label चीन. Show all posts

Tuesday, 13 October 2009

फिर भौंका चीन

चीन ने अभी ३ अक्तूबर को प्रधानमंत्री के अरूणांचल दौरे पर भौंका और पिछले साल भी प्रधानमंत्री की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर विरोध जताया था। पिछले साल प्रधानमंत्री चीन से लौटने के बाद 31 जनवरी और 1 फरवरी को अरुणाचल के दौरे पर गए थे। चीन ने निर्वासित आध्यात्मिक नेता दलाई लामा की पिछले महीने की राज्य की यात्रा का भी विरोध किया था। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'चीन की चिंताओं को दरकिनार कर भारतीय नेता के विवादित क्षेत्र के दौरे से हम बहुत असंतुष्त हैं। हम चाहते हैं कि भारतीय पक्ष चीन की गंभीर चिंताओं का समाधान करे और विवादित क्षेत्र में गड़बड़ी पैदा न करे ताकि दोनों देशों के बीच संबंध स्वस्थ तरीके से विकसित होते रहें।'
मंत्रालय की वेबसाइट पर डाले गए बयान में प्रवक्ता ने कहा है कि चीन और भारत ने भी आधिकारिक रूप से अपनी सीमा को चिह्नित करने के मसले को सुलझाया नहीं है। बायन में यह भी कहा गया है कि भारत-चीन सीमा के पूर्वी हिस्से पर चीन का रुख स्थिर और साफ है।
चीन के इस रुख के बाद भारत में चीन के राजदूत चंग यान को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया है। वह पूर्वी एशिया मामलों के प्रभारी संयुक्त सचिव विजय गोखले मिले हैं। चीन के विरोध को खारिज करते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और प्रधानमंत्री देश के किसी भी हिस्से में जा सकते हैं। विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने भी कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अविभाज्य हिस्सा है।

भारत का कहना है कि चीन ने गैर-कानूनी रूप से जम्मू कश्मीर के 43, 180 वर्ग किलोमीटर भाग पर कब्जा जमा रखा है। दूसरी ओर, चीन भारत पर उसके करीब 90 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा जमाने का आरोप लगाता है जिसका अधिकतर हिस्सा अरुणाचल प्रदेश में है।
भारत अरुणाचल को अपना अटूट अंग मानता है लेकिन चीन इसे विवादास्पद कहता है. भारत ने चीन की इस आपत्ति पर विरोध प्रकट किया है कि प्रधनमंत्री मनमोहन सिंह को इस 'विवादित सीमाक्षेत्र' का दौरा नहीं करना चाहिए था. चीन की इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने मंगलवार को कहा, "अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा है. अरूणाचल प्रदेश में रहने वाले लोग भारत के नागरिक हैं और वे भारतीय लोकतंत्र की मुख्य धारा में शामिल रहने पर गौरवान्वित महसूस करते हैं. चीन सरकार भी भारत के इस स्पष्ट रुख़ से भली-भाँति परिचित है."

चीन ने भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर यह कहते हुए 'ज़ोरदार आपत्ति' जताई है कि वो एक ऐसा सीमावर्ती क्षेत्र है जिस पर विवाद चल रहा है. चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता मा झाओक्सू ने सरकारी ने समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने एक वक्तव्य जारी करके कहा है, "भारतीय नेता ने विवादित सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा करके एक बार फिर चीन की गंभीर चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया है और इस यात्रा पर चीन प्रबल रूप से असंतुष्ट है." प्रवक्ता ने कहा कि चीन और भारत ने अपनी सीमा रेखा का कभी भी आधिकारिक रूप से रेखांकन नहीं किया है और चीन-भारत सीमा के पूर्वी हिस्से पर चीन का रुख़ बिल्कुल स्पष्ट है.

प्रवक्ता मा झाओक्सू का कहना था, "हम माँग करते हैं कि भारत सरकार चीन की गंभीर चिंताओं पर ध्यान दे और विवादित क्षेत्र में अशांति को ना भड़काए ताकि चीन और भारत संबंधों के सदभाव के साथ आगे बढ़ाने में मदद मिल सके. " भारतीय मीडिया संगठनों में छपी ख़बरों में कहा गया है कि प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने मंगलवार को अरूणाचल प्रदेश का दौरा किया और वहाँ एक चुनाव रैली को संबोधित किया.

भारतीय प्रवक्ता ने अपने बयान में यह भी कहा कि "भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह एक प्रचलित परंपरा है कि जब संसद या राज्य विधानसभाओं के लिए चुनाव होते हैं तो राजनीतिक नेता उन क्षेत्रों का दौरा करते हैं. भारत सरकार देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध है."

भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अरुणचल प्रदेश यात्रा पर चीन की ओर जताए गए विरोध पर देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा ने सरकार से इसका कड़ा प्रतिवाद करने की मांग की। पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा- ‘प्रधानमंत्री की अरुणाचल प्रदेश यात्रा के बारे में चीन ने अपना विरोध जताने के लिए जिस शब्दावली का प्रयोग किया है वह बेहद आपत्तिजनक और अस्वीकार्य है।‘

रूड़ी ने कहा कि विदेश मंत्रालय को चाहिए कि वह भारत स्थित चीन के राजदूत को बुला कर इस बारे में कड़ा प्रतिवाद दर्ज कराए। भाजपा प्रवक्ता ने कहा- यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चीन की ओर से बार-बार किए जाने वाले सीमा उल्लंघनों और प्रधानमंत्री की अरुणाचल यात्राओं पर उसके विरोध का भारत की ओर से उचित जवाब नहीं दिया जाता है।'
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हम चीनी हरकतों का जवाब देना तो दूर की बात है। सरकार इन उल्लंघनों को मीडिया की ओर से खड़ा किया गया हव्वा बताकर बता कर टालने की ही कोशिश करती है। उधर सरकार ने सिंह की अरुणाचल यात्रा पर चीन की आपत्ति को खारिज करते हुए आज दिए कड़े बयान में कहा कि यह प्रदेश भारत का एक अभिन्न अंग है। भारत ने चीन की इस टिप्पणी को निराशाजनक बताया है। इसके साथ ही भारत की ओर से यह भी कहा गया है कि इस तरह की टिप्पणियों से सीमा वार्ता की प्रक्रिया को मदद नहीं मिलेगी।

Thursday, 5 June 2008

चीन में रामदेव का योग केन्द्र


योग तक लोगों की पहुँच का विस्तार करते हुए जाने-माने योग गुरु बाबा रामदेव चीन में पहला योग केंद्र स्थापित करने की योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं।
रामदेव ने बताया कि योग धर्म नहीं है। मैं सोचता हूँ कि चीन के लिए धर्म की तुलना में अध्यात्म से बेहतर दूसरा विकल्प नहीं हो सकता क्योंकि यह सबसे ऊपर है।
लग्जरी क्रूज लाइनर सुपर स्टार वर्गो पर एक भव्य योग शिविर के आयोजन के लिए दुनिया के 15 देशों से आए 950 से अधिक व्यक्तियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे रामदेव एक साल में चीन में पतंजलि योगपीठ सेंटर की स्थापना की तैयारी कर रहे हैं। साम्यवादी देश चीन में लोगों ने योग के प्रति दिलचस्पी दिखाई है।
हरिद्वार स्थित अनुसंधान केंद्र पतंजलि योग पीठ को रामदेव एक न्यास कहते हैं, जो योग एवं औषधियों पर अनुसंधान कर रहा है। भारत और विदेश में इसकी कई शाखाएँ हैं। यह पहला अवसर है जब यह केंद्र चीन में अपनी शाखा खोलेगा।
रामदेव ने कहा कि हम चीन में कुछ काम कर भी रहे हैं, लेकिन अब तक वहाँ योग का औपचारिक केंद्र नहीं है। चीनी नागरिक परिश्रमी होते हैं और ऊर्जावान जीवनशैली के दौरान तनाव दूर करने के लिए उन्हें अलग-अलग विधियों की तलाश रहती है।
रामदेव ने कहा कि उनका मिशन योग को दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूँ कि दुनिया का हर व्यक्ति योग से परिचित हो। मुझे लगता है कि इस काम में 20 से 25 साल लग जाएँगे। मैं योग को दुनिया के अंतिम आदमी तक पहुँचाना चाहता हूँ।
बाबा अफ्रीका, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका में योग के कई शिविर और कार्यशालाओं का आयोजन कर चुके हैं। अब वह श्वास लेने तथा व्यायाम की प्राचीन कला को भारत से बाहर लोकप्रिय बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
अपने तरह के पहले विशेष 'योग ऑन सी' शिविर के एक सप्ताह के सत्र में रामदेव ने कहा कि उन्होंने मध्यम एवं उच्च मध्यम वर्ग के लोगों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अपनी ज्यादातर छुट्टियाँ तरोताजा होने और थोड़े बहुत मनोरंजन में बिताते हैं।
सुपर स्टार वर्गो पर एक सप्ताह के क्रूज शिविर में वैदिक जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए योग के अलावा चिंतन और प्राणायाम भी सिखाया जा रहा है। सुपर स्टार वर्गो 31 मई को हांगकांग के तट से रवाना हुआ है।
अनुयायियों के बीच स्वामी कहलाने वाले रामदेव ने बताया योग तो योग है चाहे इसे समुद्र में किया जाए या जमीन पर या आसमान पर। यह विशेष शिविर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि समुद्र की लहरों पर ऊपर नीचे होता जहाज मानव जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव की याद दिलाता है।
उन्होंने कहा कि शिविर का उद्देश्य लोगों को जीवन का मतलब समझाना और यह बताना है कि तीव्र संगीत और नृत्य का मतलब ही मनोरंजन नहीं होता। उन्होंने कहा आत्मावलोकन से सीखना चाहिए और जीवन पर पकड़ कमजोर नहीं पड़नी चाहिए। क्रूजलाइनर चीन के सान्या सिटी और जियामेन तथा वियतनाम के हालोंग-बे में भी रुकेगा।
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...