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Friday, August 22, 2008

मारुं अस्तित्व


' हार्ट' ना सर्वरमां जाणीतो 'स्वार्थ' नामे वायरस,
संवेदनाना संदेशा 'करप्ट्' मळे,

आपणे 'वाइड सोसिअल नेट्वर्क' मां सफळ,
आपणे 'होम' नेटवर्कमां निष्फळ,

आपणे ६ यु एस बी पोर्टसवाळा, 'मल्टी थ्रेडींग' संबंधोमां माननारा,
कोमन प्रोटोकोल - ए एस टी पी ( आर्टिफिसीअल स्माइल ट्रान्सफर प्रोटोकोल) ना सहारे जीवनारा,
रोज रोज 'कोन्फ्लिक्ट्' थाय छे - 'प्रोटोकोल्स्' 'पोर्टस', 'विचारो' - बधुं ज ...

हुं 'प्रिन्टर' , प्रिन्ट करुं बीजानां विचारो- मारा 'ब्लेन्क पेज' ब्रेइन उपर,
हुं 'स्केनर' 'स्केन' करुं विश्वासने, हुं 'क्रेकर'..'क्रेक' करुं विश्वासने- - -

'अपडेट' करुं, 'रिफ्रेश' करुं - रोज रोज मारी संस्कृतिने,
स्वागत करुं 'डिफोल्ट डेस्क्टोप'थी - 'शिफ्ट + डीलीट' करुं जूना संबंधोने .......

हुं 'नेटवर्क एन्जिनियर' - मारुं अस्तित्व - मारुं कोम्प्युटर ,
यु नो ? हुं वापरुं छुं - 'विन्डोस एस एल' - सेल्फिश लाइफ !
(Feb 2002)

Friday, August 15, 2008

शक्यतानुं ढांकण

जाओ जो कदीक शब्दोनां कटका करी रसोडामां,
विचारोना मसालियामां भेळ-सेळ रंगो मळे,

केमेय करीने जामतुं नथी आ महीं-दिल,
थोडुंक वलोवातुं ने पछी खाटी छाश मळे !

संबंधोना फ्रिजमां डोकियुं करो सहज,
अकबंध - अवनवां रंगमां लोको मळे,

हाथ फेलावो ताजा शाकनी आशमां,
बरफ आडे थीजेला वासी भात मळे !

मजल 'कापवानुं' शरू करो क्यांकथी ने,
चप्पु पर लोहीनी अमथी धार मळे,

समारतां डुंगळीनी तीखी यादो,
खबर न पडे कोइने, एम रडवानुं कारण मळे!

'छ्म्' करतो वघार ने धुमाडो गुंगळाय,
न करे याद कोइ, ने अचानक खांसी मळे !

बे-चार चीसो संभळाय दिलनां कुकरमांथी,
होंशे खोले शक्यतानुं ढांकण 'मेहुल',
.... ने आंधण सहु काचा मळे !

Friday, June 22, 2007

आवजे.. बा..हुं जाउं छुं....

बा..मोटर होम ड्राईविंग लेशन,गोल्ड कोस्ट,ओस्ट्रेलिया,२००६

बा..छापुं वांचता..सिडनी, ओस्ट्रेलिया,२००६

केसर डार्लिग,"स्टाईल बा" सिडनी, ओस्ट्रेलिया,२००६



राहुल,बा अने हुं..अमे कोलेजमां हता त्यारे..अमदावाद,१९९९

मारी बा अत्यारे ८६ वर्षनी छे, गया वर्षे ते ओस्ट्रेलिया आवी त्यारे पण नवुं जाणवानी,जोवानी अने माणवानी उत्सुक्ता हजी पण एटली अकबंध छे, अमे नाना हता त्यारथी अत्यारसुधी अमारी संभाळ लीधी छे अने हजी पण ले छे,भले अमे त्रणेय अलग अलग देशमां होईए..!

क्यांय बहार जाय तो 'रोड क्रोस' करतां संभाळजे,
नहीं तो कोइने साथे लईने जजे, एकली ना जईश,
देरासरना पगथियां उतरतां संभाळजे,
अने हा..लाकडी अने शाल लेवानुं भूली ना जती पाछी..

पाछां आवतां 'फ्रुट'के शाक ना ऊंचकाय तो,कांई नहीं,
मम्मीने ओफिसे फोन करी देजे,ओफिसेथी पाछा आवतां लेती आवशे..
अने 'वोशिंग मशीन'मां कपडां नाखीने,पेलुं 'बटन' २० उपर मूकी देजे अने..
कपडां एक-एक करीने बहार काढजे कां तो,'रमेश'ने कहेजे,
नहींतर पाछुं पेटमां दुःखशे,अने सांजे पप्पा आवीने बोलशे !
'रमेश' ना आवे तो, वासणो भले पड्यां..पछीथी थशे.

सांभळ, जम्या पछी बपोरे गेसनी 'धोळी' अने
'पेशर'नी 'पीळी' गोळी लेवानुं भूलती नहीं,
अने सूती वखते बपोरे 'ईलेक्ट्रीक कोथळी'थी 'शेक' करजे..!
तने खबर छे ने आजे बपोरे 'टी वी' उपर,
जैन 'धरम' नो 'पोग्राम' आववानो छे?जोवानुं भूलती नहीं,
अने रात्रे देरासरथी व्हेली आवी जजे,
तारी पेली 'सिरियल' 'सांस भी कभी बहुथी' आववानी छे !

जो तारे गुजराती 'सिरियल' जोवी होय तो,
'रिमोट्'नुं नीचेनुं 'बटन' छे ए दबावजे,अने पाछो तारे 'वोलुम' मोटो जोईशे..
तो तुं तेमां डाबी बाजुनुं बटन दबावजे ...ह..ने?
बपोरे पप्पा फोन करशे टपाल माटे,
अने मम्मी 'रमेश' आव्यो छे के नहीं एना माटे तो,सांजनुं जमवानुं पण पूछी ले जे..मम्मीने..

कांई पण जरुर होय तो,उपरवाळा काकीना फ्लेटनां 'बेल'नी 'चांप' दबावजे.
फ्लेटनी जाळीनी अंदरथी 'आंकडी' पाडीने राखजे,कोई जाणीतुं होय तो ज उघाडजे..

अने तुं 'चोकठुं' केम काढी नाखे छे वारे घडीए?
आखो दिवस पहेरवानी टेव पाड..
हुं पछी आवीने पगे 'मुड' (moov)लगाडी आपीश
अने पेलुं 'राहुल'वाळुं 'अमेरिका'नुं क्रिम पण लगाडती रहेजे.

मने पछी डब्बामांथी तेल काढवानुं अने
घंटीएथी लोट लाववानुं याद देवडावजे..
काले रात्रे तें आईस्क्रिम न्होतो खाधो..
फ्रिजरमां छे..बपोरे उठीने खाई लेजे..मस्त छे !

कोईनो फोन आवे तो नाम-नंबर खास लखी लेजे,
अने अंग्रेजीमां बोले'तो गुजरातीमां बोलवानुं कहेजे..
चाल तो ..हुं जाउं छुं..
सांजे दाळ-ढोकळी करे'तो 'राई' ओछी नाखजे ..हने?
अने पाछां आवतां मोडुं थाय तो राह ना जो'ती,
चिंता ना करती...जाउं छुं...
बा'बाय... "केसर डार्लिंग" !..............जाळी वासी दे पहेलां.

Monday, December 04, 2006

दोस्तार

होय ए दिवसो सबमीशनना के होय पछी एक्झाम्सनी तैयारीना
हसी लेतां'ता साथे आटला बधां टेन्शनमां
आम तो घडीभरनी नवराश नहोती ने,
दिवसो नीकळी जाता'ता आम ... जल्सा-पार्टीओमां !

मळवाना टाईम फिक्स थता'ता सवार-सांज ज्यां फोनमां
हवे कोने कहुं ए लफराओ बधां
भभरावीने मीठुं-मरचुं साथमां ?
चलाववाने मळशे शुं साथे बेसीने बाईक फुल-स्पीडमां?
ने छोकरीनी मश्करी करतां..

मळशे क्यां ए जवाब मारा हाथने तारी ताळीमां ...
बस, हांके जतो'तो साथे पेईन्टिंग्स करतां के गीतो सांभळतां
नहोतुं कंई तथ्य वातोमांने छतांय सहन करतो'तो बधुं
हसीने तुं मनमां ने मनमां !

वातो थती हती ज्यां ईशारा ने गाळोमां
मळशे क्यां ए छलकती मस्ती, हती जे 'पेली' आंखोमां !
तुं ज हतो जे जाणतो हतो के मेहुल छे केटलामां..
वर्षो वीत्यांने हजीय तुं पण एवो ज छे मारी नजरमां

मळी जशे मित्रो अनेक आ सफरमां
रस्तो जोवानो यार तारो
मेहुल आ सफरमां !

(मारा दोस्त विमल पटेल (टोरन्टो,केनेडा) ने अर्पित...)

Friday, December 01, 2006

हार



ब्रशथी दोरवा जाउं छुं
पण काळो रंग लाल थई जाय
ए पीळा सूरजमुखीमां
ओरेन्ज कलर केम वधारे पडी जाय?

कलम शुं पाडे शब्दो आडा-अवळा
खुद अक्षरो अर्थमां गूंचवाई जाय..
ने मारी पंक्तिओ खारी थई वही जाय !

फानसनुं अजवाळुं तो में मूक्युं हतुं
तोय पोट्रेईट स्त्रीओनुं केम अंधारामां छे ?
व्हाईट कलरनी ट्युबो घसाई गई बधी
छतांय आ घरेणां झांखा पडी जाय ...

साथ ना आपे मित्रो मारा
नक्की कंईक वांधो पड्यो छे,

ओला शब्दोने कलमथी
ने कलर्सने ब्रशथी
नहीं तो..
आटली जल्दीथी मेहुल
हार ना मानी जाय !

कोरो कागळ

शुं कोरो कागळ जोई लखवानुं मन थाय छे?
नक्की तारा जीवनमां कोई खाली स्थान छे.

सृष्टि ने द्रष्टि बे'यनुं महत्व सरखुं ज छे
वांचे छे ए शुं नहीं खबर होय एने ज
ध्यान तो एनुं क्यांक बहार छे.

वसंत पहेलानां पानखरनी ज आ वात छे,
एम ना कहेतां के मारा नसीब खराब छे.

ज्यांथी नीकळ्यो'तो प्रगतिना पंथ उपर
आवी पहोंच्यो फरी पाछो त्यां ज
रेखा अने वर्तुळनो भेद,
हवे मेहुलने समजाय छे !

बंध पडेल बंगलानां - जर्जरित बागनो - परिचय

( दस वर्षो पहेलां छोडेला ( हकीकते तरछोडायेला) बंध पडेला बंगला 'यशोधर' ना बागनो परिचय, ज्यां में मारुं बाळपण संताडेलुं छे )

काट खाइ गयेलो मेइन गेट खोलतां ज पहेली नजर,
बाजुमां वावेली 'मोगन वेल'ना मुळियाए तोडेली दिवाल उपर पडी,
'गॅट' ना बे 'पीलर्स'मां मुकेला 'भुंगळा'मांथी..
खिसकोलीना बच्चांनो अवाज आवतो हतो,
त्यां ज कूदी पेली 'पेंधी' पडेली बिलाडी ... अने ए अवाज शांत थइ गयो...

पग-लूछणियांनी किनारो तोडवामां घणां बधानो हाथ हतो ए हुं जाणतो हतो,
खास तो खिसकोली, कूतरां अने चकलीओ...

बहु धीरजथी में अने राहुले नांखेली त्रिकोणाकार क्यारानी इंटो ,
हवे सीधी लाइनमां नथी रही, मोटा भागनी उखडी गइ छे...

कम्पाउंडमां पडी रहेतां मारां 'ल्युना'ना मिररना डाघनी पाछळनुं रहस्य...?
हा... सवारनां पो'रमां आवती पेली राखोडी काबरो ज'स्तो !

लीमडानां थडमांथी बहार आवतुं गुंदर में केटलांय वर्षोथी भेगुं नथी कर्युं
अने बे लीमडा वच्चे बांधेला कपडानां तारने पण
पेला 'पोपटिया' पानां वडे 'टाइट' करवानां हजु बाकी छे !

अने जो'तो राहुल, बेननां घरेथी लावेला पेलां गलबा, 'पीळी पट्टी', केक्टस अने केना
हजी'य एवा ने एवा ज तरस्या छे...
'केना' नी पाछळ लपाइने झोका मारतां पेला धोळिया कूतराए करेलो खाडो
हजीय पूरायो नथी..

'पीळी करेण' उपरथी टप दइने पडतुं , 'दूध' पाडतुं 'टीडोळुं'
आजे पण मारा पग नीचे चगदायुं ...
क्यारेक एनो ढगलो करीने, लीमडानी डाळीमांथी बनावेला 'गिलोल'थी,
उनाळाना वेकेशनमां बपोरे, छुपाइने लोकोने मारवामां 'टाइम पास' थतो'तो .. हे..ने?

कोटे-कोटे जती पाणीनी पाइपो उपर, काट ना लागे ए माटे,
जाते लगाडेल लाल कलर हजी गयो नथी,
पण.. पाइपनां नळ कोइ चोरी गयुं छे !

'करपायेली' टोटी हजी ओरडीनां भंगारमां पडी छे..
एनी बाजुमां ज माळी पासे खास मंगावेल छाणीया खातरनो
फाटी गयेलो कोथळो पड्यो छे...

आपणो वावेलो 'देशी' मोगरो हवे रह्यो नथी.. हा..
'जुइ' ना मूळियां उधइ सामे हजु पण झझूमी रह्या छे !

पेंड्युला पण हवे सपोर्ट विना उभा रहेतां थइ गया छे,
तेना थडने अडवां जतां, लाल कीडीओनी धार मने वळगी पडी,
क्यारेक एनी डाळीओमां, बुलबुले मूकेला इंडा अने बच्चाने
कलाको सुधी जोतां'ता ! अने..हा कागडा, बिलाडी उपर खास नजर राखता'ता..

'परदा वेल' थोडाक दिवसो पहेला कपावी नाखी ..पप्पानुं मानवुं हतुं'के...
ए 'खाली' जंगली झाडी हती अने मच्छर पण बहुं थता हतां..
मारुं मांनवु छे के , ए 'यशोधर'ना वरंडानी शोभा हती अने...
मारा फेवरीट 'ब्लु बर्ड'नुं घर हतुं ... !

पाछळनी चोकडीमां लील बाझी गइ छे अने पप्पानी ना पडवा छतां,
तेनी बाजुमां ज में वावेला चंपानुं झाड मोटुं थइ गयुं छे'ने एना मूळियाए,
बिचारी गटर फरते भींस लइ लीधी छे...

एना उपर आवेला फूलो ने अडवा गयो' पण............
एक 'जंगली करोळिया' ए बांधेला जाळामां मारो हाथ लपेटाइ गयो ..
त्यारे ज सूकायेला पांदडामां, एक काचिंडो झडपथी दोडी गयो ...

हजी'तो घणं बधुं शोधवानुं बाकी छे ,
पेली मधुमालतीना क्यारानी नीचे संताडेलो काचना टुकडानो खजानो,
क्यारामां ज घरघत्ता रमतां बनावेल होजनी सिमेंटनी पाइपो,
चोमासामां खोवाइ गयेली मारी दूधिया लखोटीओ,
चोकडीनी इंटो नीचे छूपायेला अने मने हंमेशा डरावतां
'झेरी' कानखजूरा, चीकणी माटीमांथी उभरातां अळसिया.. बधुं'ज...

अने हजी'तो मारे आखा दिवसमां मोरे पाडेला बधां पींछा
कंपाउंडमांथी भेगा करवाना छे ....

सांज पडवा आवी ... अनायासे .. मारा पग पाणी छांटवानी टोटी
अने चोकडी तरफ उपड्या..
अचानक भान थयुं , न'तो त्यां नळ हतो, ना पाणी हतुं !

मांड महेनते एक वखत बांधेली, पाणीना व्हेण माटेनी 'कोरी' पाळमांथी,
एक सामटां फूटी नीकळेला जंगली घास अने हा.. पेला कपडा उपर
चोंटी जाय'ने ते 'कूतरा'ओ...... बधा मारा उपर खडखडाट हसवा लाग्यां..... !

हुं.. वरंडा उपर, 'मोटा अक्षरे' लखेल 'यशोधर' ने तांकी रह्यो ...
डूबतां सूरजमां अक्षरोनो रंग धीमे धीमे 'पीळियो' .. 'फिक्को' ..
अने साथे ज हुं पण अशक्त बनतो जतो हतो.......

Thursday, November 30, 2006

वार केटली ?

खोटी मथामण करी रह्यो छे ए
दिलना अंगारा बुझाववा
बाकी एक फूंक मारी ..
भडको करतां वार केटली ?

घणां समय पछी मांड शांत रह्युं छे आ पाणी
बाकी आ रह्यो कांकरो हाथमां
वमळो पेदा करतां वार केटली?

तणखलुं पकडी वर्षोथी बचवा फांफां मारे छे
बाकी दरियो तो बहुं ऊंडो छे
डूबतां वार केटली ?

जाणी जोईने मौन बनी ए बेसी रह्यो
बाकी त्रण शब्दो ज छे
कहेवामां वार केटली ?

आ तो जीद छे बस ..
के खुश थई सामेथी आपी दे एने
बाकी 'मेहुल'ने झूंटवी लेतां वार केटली?

Monday, November 27, 2006

पण होई शके !

कोणे कीधुं दुःखनी भाषा रुदन छे
ए मारुं हसवुं पण होइ शके ..
'नभ-धरा' तमारा माटे कविताना शब्दो छे,
कोईकनुं ते 'घर' पण होई शके !

सवार ऊगे छे ने सांज ढळे छे,
अत्यंत स्वाभाविक आ दिवस छे
कोईकने झूरती आंखो कंईक बोले छे
तेने माटे ते आखुं वर्ष पण होई शके !

लखवो ने बोलवो सहेलो छे
अढी अक्षरनो ए शब्द छे
जरा एने दिलमां उतारी जोजे
कदाच केटलीय जिंदगीओ
एमां समेटायेली पण होई शके?

ते भागे छे, पेलो दोडे छे
शुं बस आ ज जिंदगी छे..
आवी जाय हाथमां त्यारे आंख उघाडजे
कदाच ए तारुं सपनुं पण होई शके !

एक छोकरी

एक हाथ छे आंखो उपर
ने बीजो धबकतां दिल उपर
एक छोकरी शरमायने
मारुं विश्व एमां समाय छे.

अडोअड बेठी छे
पाछळ ए बाईक उपर
एक छोकरीनी शिखामण छतांय
आटली बधी झडप मराय छे?

फूटतां दाणां मकाईना ने
मसालो पण छंटाय छे
एक छोकरी मझाथी खाय ने
बे होठो वच्चे दिल पीसाय छे !

अडुं तो गुस्से थाय ने
ना अडुं तो ईशारा थाय
एक छोकरीए उभी करेली मूंझवण
ने एमां दिवानो मूंझाय छे !

आ मारी कापली ने ला'य तारी कापली,
एक-बे किताबोनी आप-ले पण थाय,
एक छोकरी नथी साव भोळी,
बहु जल्दीथी एने घरे जवानुं मोडुं थाय छे !